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UP: कैदियों की समय पूर्व रिहाई पर दाखिल करें हलफनामा या कोर्ट में हाजिर हों, प्रमुख सचिव गृह-DGP को निर्देश

Thu, 21 Dec 2023 11:33 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने हाईकोर्ट के महानिबंधक को 24 घंटे के भीतर आदेश की प्रति दोनों अधिकारियों को भेजने का भी आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान और न्यायमूर्ति आरएमएन मिश्र की खंडपीठ ने यह आदेश राशिद व अन्य की अपील पर दिया है। 
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allahabad high court - फोटो : social media
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी से जेल अधीक्षकों के मार्फत कैदियों की समय पूर्व रिहाई की लंबित संख्या सहित हलफनामा मांगा है। आदेश का पालन न होने पर दोनों अधिकारियों को 10 जनवरी को हाजिर होना पड़ेगा। कोर्ट ने सीजेएम को निर्देश दिया है कि 19 अप्रैल, 2022 को जमानत मंजूरी के बावजूद बेल बांड जमा न हो पाने के कारण याची राशिद व अन्य की तत्काल रिहाई करा कर रिपोर्ट पेश करें।
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कोर्ट ने हाईकोर्ट के महानिबंधक को 24 घंटे के भीतर आदेश की प्रति दोनों अधिकारियों को भेजने का भी आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान और न्यायमूर्ति आरएमएन मिश्र की खंडपीठ ने यह आदेश राशिद व अन्य की अपील पर दिया है। 

कोर्ट ने इसी वर्ष 18 मई को राज्य सरकार से वरीयता के आधार पर कैदियों की दो हफ्ते में समय पूर्व रिहाई पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद याची रिहा नहीं किए गए। कोर्ट ने कहा सुप्रीम कोर्ट ने भी समय पूर्व रिहाई के आदेश दिए हैं। समय से अर्जी तय करने के आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है। 
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थेरेपी ऑपरेटर को एक्स-रे टेक्नीशियनन का वेतनमान देने पर विचार करे सरकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक को मेडिकल कॉलेज में तैनात रेडियो थेरेपी ऑपरेटर को एक्स-रे टेक्नीशियन का वेतनमान देने पर विचार कर तीस दिन के भीतर संशोधित वेतनमान के मुताबिक बकाए का भुगतान करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकल पीठ ने आगरा के सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज के रेडियोथेरेपी विभाग में तैनात रेडियो थेरेपी ऑपरेटर संजय कुमार सिंह की याचिका पर अधिवक्ता सुनील यादव को सुन कर पारित किया।

मामला आगरा मेडिकल कॉलेज का है। याची की नियुक्ति वर्ष 2006 में रेडियो थेरेपी ऑपरेटर के पद पर हुई थी। इसके बाद विभाग ने याची को एक्स रे टेक्नीशियन का प्रशिक्षण दिलवाया था। विभाग में याची से नियमित रूप से रेडियो थेरेपी ऑपरेटर का काम लिया जा रहा है। सभी मेडिकल कॉलेजों के एक्सरे तकनीशियनों को 4200 का वेतनमान दिया जा रहा है, जबकि याची इस लाभ से वंचित चल रहा था। याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

 

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि रेडियो थेरेपी ऑपरेटर का पद एक्स-रे तकनीशियन कैडर का पद है। पूर्व में निर्गत शासनादेश के जरिए इसका पदनाम बदल दिया गया था, जबकि रेडियो थेरपी ऑपरेटर का कार्य एक्स-रे टेक्नीशियन के समान ही है। इसलिए समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के मुताबिक याची एक्सरे तकनीशियनों के समान वेतनमान पाने का हकदार है।
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कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक को वेतन विसंगतियों पर विधि अनुसार निर्णय लेते हुए आदेश पारित करने और तीस दिन के भीतर संशोधित वेतनमान के मुताबिक बकाए वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया।
 
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