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प्रयागराज : लिपिक के पदों पर पदावनत हुए 106 जेई एक साथ हुए बीमार, मेडिकल लीव पर गए

Mon, 09 May 2022 06:32 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

पीडब्ल्यूडी में नियमों को ताक पर रखकर लिपिक से जेई बनाए गए 106 अभियंताओं ने शासन के पदावनत आदेश को ताक पर रख दिया है। पिछले नौ वर्ष से लिपिक संवर्ग से पदोन्नति पाकर जेई का वेतन लेने वाले इन अभियंताओं से रिकवरी की तैयारी की जा रही थी।
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demo pic - फोटो : social media
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विस्तार
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पीडब्ल्यूडी में अवर अभियंता पद से हटाकर पदावनत किए गए 106 जेई एक साथ बीमार पड़ गए हैं। शासन की ओर से पदावनत आदेश जारी होने के बाद किसी ने भी अपने मूल पदों पर योगदान आख्या नहीं दी है। अलबत्ता प्रमुख सचिव और प्रमुख अभियंता के आदेशों को दरकिनार करते हुए सभी अवर अभियंता चिकित्सकीय अवकाश पर चले गए हैं।

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पीडब्ल्यूडी में नियमों को ताक पर रखकर लिपिक से जेई बनाए गए 106 अभियंताओं ने शासन के पदावनत आदेश को ताक पर रख दिया है। पिछले नौ वर्ष से लिपिक संवर्ग से पदोन्नति पाकर जेई का वेतन लेने वाले इन अभियंताओं से रिकवरी की तैयारी की जा रही थी। लेकिन, अभी तक उन अभियंताओं ने पदावनत किए जाने के बाद अपने मूल पदों पर योगदान आख्या ही नहीं दी है।  


दूरस्थ शिक्षा केंद्रों के डिप्लोमा के आधार पर लिपिकीय संवर्ग से पदोन्नति पाने वाले इन अवर अभियंताओं ने शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए चिकित्सा अवकाश ले लिया है। पता चला है कि अवर अभियंता और लिपिक संवर्ग के वेतनमान में 15 हजार रुपये का अंतर है। लिपिक संवर्ग के इन कर्मचारियों से पिछले नौ वर्ष तक जेई के लिए गए वेतनमान की रिकवरी सबसे अधिक परेशानी का कारण बनी है।

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आधा दर्जन से अधिक बड़े अफसरों पर भी लटकी तलवार

इसके अलावा करीब आधा दर्जन से अधिक बड़े अफसरों पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। ऐसे में इस पदावनत आदेश का क्रियान्वयन न होने देने के लिए अवर अभियंताओं ने ताकत लगा दी है।  प्रमुख अभियंता नियोजन की कार्रवाई के बाद पदावनत किए गए अभियंताओं ने लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद के दफ्तर का भी चक्कर काट रहे हैं। राजनीतिक दबाव बनाकर इस आदेश को बदलवाने की कोशिशें की जा रही हैं।


अफसरों के मुताबिक लिपिकीय संवर्ग की प्रोन्नति के लिए जारी नियमावली के तहत जेई के 95 फीसदी पदों को आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती के जरिए भरा जाना था। जबकि, पांच प्रतिशत पदों पर विभाग में नियुक्त समूह ग के लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति दी जानी थी। लेकिन, पदोन्नति में मानक का ध्यान नहीं रखा गया।


इस मामले में नियुक्ति से पहले डिप्लोमा का सक्षम संवैधानिक संस्था से सत्यापन भी नहीं करवाया गया। ऐसे में योगी आदित्यनाथ सरकार की दूसरी पारी में इस मामले की शिकायत की जांच कराने के बाद शासन ने हाल में ही इन अवर अभियंताओं को अपने मूल लिपिक पदों पर पदावन करने का आदेश जारी किया था।
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कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में अवर अभियंता
पदावनत किए गए अवर अभियंता अब राहत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। इस मामले में लिपिकों को नियम विरुद्ध जेई बनाने वाले अफसरों पर गाज गिर सकती है। ऐसे में पदावनत किए गए अवर अभियंता मूल पदों पर जाने की बजाए कोर्ट की शरण ले सकते हैं। चर्चा है कि इसीलिए अवर अभियंताओं ने मूल पदों पर ज्वाइन करने की बजाए चिकित्सा अवकाश ले लिया है।
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