मलखान सिंह जिला अस्पताल में कुल सात वेंटिलेटर हैं। जिसमें दो ओटी में और दो वेंटिलेटर वीआईपी वार्ड में लगे हैं। बाकी तीन वेंटिलेटर पर्याप्त स्थान, टेक्नीशियन और फिजिशियन के अभाव में धूल फांक रहे हैं। अगर इनका संचालन शुरू हो जाए, तो मरीजों को इसकी सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
अलीगढ़ जिला अस्पताल में रखे तीन वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। फिजिशियन और टेक्नीशियन की कमी के कारण इनका संचालन बंद है। वहीं इनके संचालन के लिए जगह का भी अभाव है। इसके लिए विभाग को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका। नतीजा यह कि मरीजों के इलाज में बेहतरी की उम्मीदें यहां परवान नहीं चढ़ पा रही हैं।
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मलखान सिंह जिला अस्पताल में कुल सात वेंटिलेटर हैं। जिसमें दो ओटी में और दो वेंटिलेटर वीआईपी वार्ड में लगे हैं। बाकी तीन वेंटिलेटर पर्याप्त स्थान, टेक्नीशियन और फिजिशियन के अभाव में धूल फांक रहे हैं। अगर इनका संचालन शुरू हो जाए, तो मरीजों को इसकी सुविधा का लाभ मिल सकेगा। कोरोना काल में वेंटिलेटर के लिए पूरे प्रदेश में अफरा-तफरी की स्थिति थी। मरीजों की जान बचाने के लिए शासन स्तर से सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटरों की सुविधा मुहैया कराई गई थी। लेकिन, संसाधन और स्टाफ की कमी के कारण ये मशीनें बंद है।,
वेंटिलेटर के संचालन को लेकर कई बार पत्राचार किया गया है। स्टाफ की कमी की वजह से इसका संचालन नहीं हो पा रहा है।-डॉ. जगवीर वर्मा, सीएमएस।
संचालन के लिए इनकी पड़ेगी जरूरत
इन मशीनों के संचालन के लिए फिजिशियन, एनेस्थेटिस्ट, स्टाफ नर्स, मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन की जरूरत है। जिला अस्पताल में काफी समय से फिजिशियन और टेक्नीशियन के पद खाली हैं। दो एनेस्थेटिस्ट जिला अस्पताल में पहले से ही मौजूद हैं। अगर टेक्नीशियन और फिजीशियन की तैनाती हो जाए तो जीवन रक्षक मशीनें क्रियाशील हो जाएंगी।