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अलीगढ़ः शहर में धूल और धुंध का गुबार फुला रहा दम

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रामघाट रोड पर छाई धुंध से होकर गुजरते वाहन चालक। - फोटो : CITY OFFICE
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शहर की हवा शनिवार से प्रदूषित होती जा रही है। आलम ये है कि शहर में वायु प्रदूषण सूचकांक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार सुबह वायु प्रदूषण का सूचकांक 190 रहा, जबकि शाम को 170 रहा। शनिवार-रविवार की अपेक्षा सोमवार को वायु प्रदूषण के स्तर में वृद्धि दर्ज की गई। खांसी-जुकाम, अस्थमा, दिल की बीमारी और कैंसर का कारक मुख्य प्रदूषण (मैन पॉल्यूटेंट-पीएम) सामान्य आंकड़ों से दोगुना दर्ज किया गया। मानक 60 एमजीसीएम (माइक्रो ग्राम क्यूबिक की 141 रिकॉर्ड किया गया। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों का दम फूलने लगा है।
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पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि पीएम 2.5 कण सूक्ष्म आकार का होता है, जो आसानी से हमारी सांसों के जरिये फेफड़ों तक चला जाता है। इसके चलते फेफड़े और लीवर सबसे पहले प्रभावित होते हैं, जिससे खांसी, जुकाम, अस्थमा, दिल की बीमारी के साथ कैंसर होने का खतरा रहता है। पीएम 2.5 कण डीजल वाहनों आदि से कार्बन कणों के साथ निकलते हैं, जो कैंसर के कारक होते हैं। पीएम (मुख्य प्रदूषक) 2.5 का सामान्य स्तर 60 एमजीसीएम होता है, जबकि अलीगढ़ में इसका स्तर सोमवार को 141 तक पहुंच गया। अगर कोई व्यक्ति बिना मास्क लगाए एक बार सांस लेता है तो शरीर के अंदर 10 सिगरेट पीने जितना धुआं चला जाता है।
पीएम 2.5 का बढ़ने का मतलब खतरनाक है स्थिति
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक अधिकारी जेपी सिंह ने बताया कि वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही पीएम 2.5 का स्तर भी बढ़ने लगा है। इसका मतलब यह है कि स्थिति खतरनाक होने लगी है। वायु प्रदूषण का स्तर नियंत्रित रखने के लिए सड़कों से धूल न उड़े, उसके लिए पानी का छिड़काव करना होगा। डीजल चालित पुराने वाहनों को चलाने से बचना चाहिए। इससे पीएम 2.5 कणों का उत्सर्जन कम होगा।
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-जेपी सिंह, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड।
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