ग्रामीणों का कहना है की बीते कई दिनों से रुक - रुक कर हो रही बारिश के चलते हादसा हुआ है। मिट्टी के गारे से बनी दीवारों पर प्लास्टर भी नहीं था। जिससे बारिश के कारण दीवार नम रहीं। साथ ही छत पर गाटर - पत्थर के ऊपर केवल मिट्टी डाल रखी थी।
बुखार पीड़ित बालिका की दस मिनट पहले लेकर आई थी दवा, हमेशा के लिए सो गई
बालिका के दादा भूप सिंह का कहना है कि गांव के एक निजी स्कूल के एलकेजी में पढ़ने वाली वंशिका कई दिन से बुखार से पीड़ित थी। घटना से करीब दस मिनट पहले वह दवाई लेकर आई और खाकर सो गई। किसी नही पता था कि वह हमेशा के लिए सो जायेगी।
रात्रि में होता हादसा तो हो सकती थी बड़ी जनहानि
भूप सिंह के इस मकान के बाहरी हिस्से में एक हॉल था, जिसमें आटा चक्की व चारा काटने की मशीन लगी थी। अंदर की ओर कमरे थे। भूप सिंह के साथ इस मकान में 11 लोग रहते थे, जिसमें उनकी पत्नी राजवती, बड़ा बेटा दिनेश उसकी पत्नी विमलेश, तीन बच्चे, छोटा बेटा विष्णु, उसकी पत्नी रजनी और दो बच्चे रहते थे। ग्रामीणों में चर्चा थी कि हादसा उस समय हुआ, जब 11 सदस्यों में से केवल 7 वर्षीय वंशिका अंदर थी। यदि रात्रिकाल में यह हादसा होता तो बहुत बड़ी घटना हो सकती थी।