2014 में लखनऊ की नाट्य प्रतियोगिता में काल निर्णय नाटक की प्रस्तुति देते कलाकार।
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शहर के रंगमंच कलाकारों के नाटक सुर्खियां बटोर चुके हैं। संस्कार भारती के बैनरतले रंगमंच के कलाकारों ने वर्ष 2002 से अब तक 150 बार छोटे-बड़े नाटक और नुक्कड़ नाटक का मंचन कर चुके हैं, इनमें हम भूल न जाएं उनको, पुकार, काल निर्णय, क्रांति का बिगुल, द कृष्णा म्यूजिक एंड लाइट शो काफी प्रसिद्ध हुए।
संस्कार भारती ने थिएटर कलाकारों को लेकर वर्ष 2002 में नाट्य वेदम की पहल शुरू की। इस शाखा के जरिए कलाकारों को इकट्ठा किया गया और नाटक तैयार किए गए। इस तरह शहर के अंदर थिएटर मंचन की शुरुआत हुई। संस्कार भारती के ब्रज प्रांत नाट्य संयोजक आलोक शर्मा, अध्यक्ष कुमार चंद्रहास शर्मा व महामंत्री डॉ. प्रभात दास गुप्ता के निर्देशन में कलाकार तैयारियां कर रहे हैं।
पदाधिकारियों ने बताया कि 2002 में सबसे पहला नाटक हीरालाल बारहसैनी इंटर कॉलेज में शहीदों और आतंकवाद के ऊपर हम भूल न जाएं उनको... प्रस्तुत किया गया था। यह नाटक तीन घंटे का था, जिसमें 75 कलाकार थे। 2006 में 55 कलाकारों ने पुकार में काम किया। इसी साल क्रांति का बिगुल नाटक भी प्रस्तुत किया, जिसमें 40 कलाकारों ने 1858 से लेकर 1947 तक की पूरी कहानी दिखाई थी।
2010 में द कृष्णा लाइट एंड साउंड शो कृष्णांजलि में आयोजित किया गया। इसके बाद हम सब पागल हैं कॉमेडी प्ले, शहीदाने वतन, मां तुझे प्रणाम नाटक भी आयोजित हुए।
इन सभी नाटकों ने काफी सुर्खियां बटोरी। आलोक शर्मा ने बताया कि अब तक 150 से 200 छोटे-बड़े नाटक व नुक्कड़ नाटक कर चुके हैं। मुख्य रूप से जुड़े कलाकारों में अनुज श्रीवास्तव, शिल्पी अनुज, संजय गोयल सीए, हरिमोहन रामू, श्रेष्ठ वार्ष्णेय, मनीष शर्मा आदि रहते हैं।