कासिमपुर जाते समय दबोजा गया अरुण
इसी बीच चार टीमें इन लोगों की गिरफ्तारी के लिए लगाई गईं। पुलिस टीमें सर्विलांस की मदद से इन चारों को खोज रही थीं। इसी बीच रविवार रात अरुण अग्रवाल को अपनी कार से कासिमपुर जाते समय दबोच लिया गया। बाद में उसकी निशानदेही पर अरुण के ऑक्सीजन प्लांट के सिक्योरिटी गार्ड साथा, जवां निवासी विकास व हत्या में शामिल रहे दूसरे साथी पवन को गिरफ्तार कर लिया गया।
प्लांट के गार्ड ने सौदा तय कराया
एसपी सिटी के अनुसार, पूछताछ में अरुण अग्रवाल ने स्वीकारा कि वह अपनी पत्नी के व्यवहार से बेहद परेशान था। वह अक्सर उससे गाली-गलौज व रोकटोक करती थी। इसी मानसिक तनाव में उसने काफी पहले पत्नी की हत्या की योजना बनाई। इसी योजना में उसके प्लांट के गार्ड विकास ने मदद करते हुए अपने गांव के पवन व अशोक उर्फ टशन को शामिल कर एक लाख रुपये में हत्या करना तय किया।
योजना के तहत 12 अक्तूबर की शाम को वह तीनों को लेकर अपने घर पहुंचा। जहां दोनों बच्चों को डरा धमका कर ड्राइंग रूम में बैठाकर टीवी की तेज आवाज कर दी। घर के बाहर मौजूद भाड़े के तीनों आरोपियों अंदर बुलाकर पत्नी के कमरे में ले जाकर उसकी गला घोंटकर हत्या की। इस दौरान खुद अरुण व विकास ने उसके हाथ पैर पकड़े। बाद में कमरे के पास के वाशिंग एरिया में बने झूले की रस्सी का फंदा बनाकर आत्महत्या दर्शाने के लिए लाश कमरे के एक छोर पर बने वेंटीलेशन जाल पर लटका दी।
हत्या के बाद प्लांट पर गया था अरुण
इसके बाद अरुण दोनों बच्चों व आरोपियों को अपने साथ लेकर घर में ताला डालकर सीधे अपने प्लांट पहुंचा, जहां सबूत मिटाने के उद्देश्य से अपनी फैक्टरी में लगे सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर निकाला। फिर बच्चों को श्याम नगर लाकर अपने बड़े भाई के घर छोड़ा और उन्हें पूरा वाकया बताया। इसके बाद दिल्ली जाते समय रास्ते में चलती कार से डीवीआर फेंक दी। दिल्ली से सभी आरोपी अलग-अलग हो गए। अरुण ने स्वीकारा कि हत्या में तय सुपारी के अनुसार 60 हजार रुपये दे दिए गए थे। अब 40 हजार रुपये देने आते समय उसे दबोच लिया गया। इस खुलासे में सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय, इंस्पेक्टर क्वार्सी, नगर सर्विलांस टीम के संदीप सिंह, एसओजी प्रभारी संजीव कुमार व उनकी टीम की भूमिका रही है।