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अलीगढ़ में ब्राह्मण सम्मेलन: बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा का हमला, प्रदेश में ब्राह्मणों के बीच दशहत का माहौल बना रही भाजपा

Tue, 03 Aug 2021 07:04 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

सतीश मिश्रा ने बताया कि इस गोष्ठी का उद्देश्य प्रबुद्ध समाज को उसको दायित्व याद दिलाना है कि वह डरें नहीं मुकाबला करे। उन्होंने कहा कि इस मुकाबले में बसपा ब्राह्मणों के साथ है, जैसे 2007 में थी। सवाल पूछा..आज उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के हालात बदतर क्यों हो गए हैं। 
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा है कि भाजपा प्रदेश में दहशत का माहौल बना रही है। ब्राह्मणों और दलितों का लगातार उत्पीड़न हो रहा है। बीते साढ़े चार साल में कई ब्राह्मणों की हत्या हुई है। इस समाज को लगातार टारगेट किया जा रहा है। 
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वह मंगलवार को मैरिस रोड स्थित हबीब गार्डन में प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने श्रीराम मंदिर के चंदे, बेरोजगारी, अपराध, विकास के मुद्दों पर भाजपा के साथ सपा को भी निशाने पर लिया। सतीश मिश्रा बीती 23 जुलाई से पूरे प्रदेश में प्रबुद्ध सम्मेलन कर रहे हैं, जिसका पहला चरण अयोध्या और दूसरा बांकेबिहारी से शुरू हुआ है। दूसरे चरण के तहत वह मंगलवार को आगरा से अलीगढ़ आए थे। यहां से वह देर शाम को बरेली रवाना हो गए। 

सतीश मिश्रा ने बताया कि इस गोष्ठी का उद्देश्य प्रबुद्ध समाज को उसको दायित्व याद दिलाना है कि वह डरें नहीं मुकाबला करे। उन्होंने कहा कि इस मुकाबले में बसपा ब्राह्मणों के साथ है, जैसे 2007 में थी। सवाल पूछा..आज उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के हालात बदतर क्यों हो गए हैं। 
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पहले भाजपा ने दलित समाज के लोगों को परेशान किया। बेटियों को जलाने, दुष्कर्म करने की कई घटनाएं हुई हैं। हाथरस में बेटी की बॉडी को माता-पिता को नहीं दिया। मिट्टी का तेल डाल कर जला दिया। उत्तर प्रदेश ही नहीं, जहां-जहां भाजपा सत्ता में है। वहां ऐसा ही हुआ है। 
 


पूना कांड को नहीं भूल सकते। उत्तर प्रदेश में इनकी सरकार आने के बाद ब्राह्मण समाज को निशाने पर लिया जा रहा है। प्रतापगढ़ में पांच-पांच नौजवानों को जला दिया गया। जिनको बाद में अपराधी बताया गया। रायबरेली, बुदेलखंड, झांसी में ऐसे ही किस्से हुए। 

कई लोगों के एनकाउंटर ऐसे ही कर दिए गए, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने एनकाउंटर को गलत बताया है। बलिया में खुलेआम विधायक की सरपरस्ती में अपराधी बचाए गए। कानपुर में एप्पल कंपनी में कार्यरत लड़के को गोली मार दी गई। लखनऊ से एक युवा ब्राह्मण लड़के को मारा दिया गया। 

राजधानी में ऐसे तीन मामले हुए। कानपुर में एक व्यक्ति की आड़ लेकर दर्जनों ब्राह्मण के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। मजबूत ब्राह्मणों को परेशान किया जा रहा है। गिनती गिने तो सैकड़ों किस्से हैं। उन्होंने कानपुर की साढ़े सोलह की लड़की खुशी दुबे का किस्सा सुनाया। 

राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि भाजपा की सोच ब्राह्मण के लिए सपा से हटकर नहीं है। सपा शासनकाल में कन्नौज में नीरज मिश्रा की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने याद दिलाया कि प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी 13 प्रतिशत है। तीन करोड़ से अधिक ब्राह्मण हैं। 

 


इतनी संख्या के बाद 5 से 6 विधायक रह गए हैं। अब वक्त आ गया है कि ब्राह्मण बंटे नहीं। ब्राह्मणों और दलितों के साथ अन्य समाज का वोट मिला दें तो 45 से 50 फीसदी तक संख्या पहुंच जाती है। ऐसे में ब्राह्मण समुदाय 2007 की स्थिति को दोहरा सकता है। 

बसपा सरकार बनने पर उनका पूरा सम्मान होगा। 2007 में बसपा सरकार में 15 एमएलसी ब्राह्मण थे, विधान परिषद अध्यक्ष भी इसी वर्ग से थे। 35 अन्य लोगों को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था। पांच हजार सरकारी वकील इस समुदाय से थे। जिनका मानदेय दस गुना बढ़ाया गया था। लोकसभा में उनको आज तक नेता बना कर रखा गया है। इसलिए इस वर्ग का सम्मान बसपा में ही सुरक्षित है। 

सतीश मिश्रा ने कानून व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक, प्रदेश में हर दो घंटे में एक महिला से दुष्कर्म हो रहा है। विकास के बाबत कहा कि बसपा से ज्यादा काम किसी सरकार में नहीं हुए। अयोध्या में सरयू नदी के किनारे के घाट, बनारस में गंगा किनारे के घाट, इलाहाबाद में सीवरेज सिस्टम बनाया। मथुरा वृंदावन में 550 करोड़ रुपये से सीवरेज सिस्टम, सरकारी मेला, परिक्रमा मार्ग सहित काम कराए गए। 550 करोड़ रुपये का काम मैंने खुद कराया। 

आखिर श्रीराम मंदिर का चंदा कहां है: सतीश 
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि उनका प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन का पहला चरण अयोध्या से 23 जुलाई को शुरू हुआ, दूसरा चरण वृंदावन में श्रीबांकेबिहारी के दर्शन के साथ शुरू हुआ है। जब मैं अयोध्या गया तो उन्होंने पूछा कि आप अयोध्या क्यों आएं। बताइए क्या कोई भगवान का ठेका ले सकता है। क्या ब्राह्मणों को पूजा अर्चना करना सिखाया जाएगा..? 
 
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ब्राह्मणों को बचपन से ही ये संस्कार दिया जाता है। बाद में पता चला कि वो हमारा विरोध इसलिए कर रहे थे, क्योंकि श्रीराममंदिर के नाम पर जुट रहे चंदे का खुलासा न हो। दस हजार करोड़ रुपये का चंदा कहां है। 1993 से अभी तक कितना चंदा हुआ है। पांच अगस्त 2020 को श्रीराममंदिर का शिलान्यास हुआ था। 

एक साल बाद कोई काम नहीं हुआ है तो पैसा कौन सी योजना में जा रहा है। मैं ही नहीं अब लोग पूछने लगे हैं कि मंदिर के नाम पर जुटा चंदा कहां है। अगर भाजपाई धर्म के ठेकेदार हैं तो संस्कृत विद्यालय क्यों बंद हो रहे हैं। जब बच्चे वेद, पुराण नहीं पढ़ेंगे तो धर्म का प्रचार कैसे होगा..? इससे उल्ट बसपा सरकार में संस्कृत विद्यालयों को अनुदान दिया गया था। भाजपा इस प्रदेश से हिंदू संस्कृति और सनातन धर्म को खत्म करने पर तुली है। 
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