आशीष श्रीवास्तव, अलीगढ़।
साथा चीनी मिल की नई यूनिट की मांग वर्षों पुरानी है। वर्ष 1969 में स्थापित हुई 12500 क्विंटल प्रतिदिन क्षमता वाली इस मिल की हालत इतनी खस्ता है कि हर साल गन्ना किसानों को पेराई के लिए यहां वहां भटकना पड़ता है। इससे किसान गन्ने की खेती से विमुख होते जा रहे हैं।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 16 वर्षों में गन्ने का रकबा पूर्व की तुलना में करीब 25 फीसदी रह गया है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2005-06 में गन्ने का रकबा करीब 22 हजार हेक्टेयर था। वह अब घटकर 4500 हेक्टेयर रह गया है, जबकि मिल में पेराई न होने के कारण 70 प्रतिशत किसान गन्ने की खेती से विमुख हो गए हैं। यदि मिल की नई यूनिट नहीं लगी तो यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
अन्य फसलों में लागत ज्यादा और मुनाफा कम
पेराई न होने की समस्या के चलते गन्ना किसान अन्य फसलों मसलन धान एवं गेहूं की ओर मुड़ गया है। छह-छह महीनों की इन फसलों में लागत ज्यादा और मुनाफा कम है। इससे किसान पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। उदाहरण के तौर पर देखें तो पूरे वर्ष चलने वाली गन्ने की फसल का उत्पादन एक बीघे में औसतन 70 क्विंटल है, जबकि इसकी खरीद 325 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से होती है।
इसमें किसान का खर्च कुल मिलाकर 305 रुपये क्विंटल का आता है। यानी उसे प्रति क्विंटल 20 रुपये की बचत होती है। एक बीघे में 70 क्विंटल के हिसाब से देखें तो किसान को 1400 रुपये प्रति बीघे की बचत होती है, जबकि धान में एक बीघे में करीब 7300 रुपये क्विंटल की लागत आती है।
2200 रुपये क्विंटल के दाम से देखे तो किसान की कमाई 6600 रुपये प्रति बीघे की कमाई होती है। जबकि गेहूं में 4720 रुपये प्रति बीघे की लागत आती है। जबकि कमाई 5865 रुपये प्रति बीघे की होती है। यह बात दीगर है कि यह दोनों फसल छह-छह माह की हैं, जबकि गन्ना पूरे साल की फसल है। दोनों की औसत कमाई की तुलना गन्ने से करें तो किसान घाटे में ही है।
52 वर्ष पुरानी मिल के नहीं मिलते कलपुर्जे
अलीगढ़। मिल के महाप्रबंधक लालता प्रसाद ने स्वीकार किया कि 52 वर्ष पुरानी साथा चीनी मिल के अब कलपुर्जे भी नहीं मिलते हैं। इसकी मशीनें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। इस वजह से मिल के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं।
क्या बोले किसान
-मिल में पेराई की समस्या के चलते गन्ना किसान धान एवं गेहूं की फसलों की ओर मुड़ गया है। इसमें लागत ज्यादा और मुनाफा कम होने से किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।
डॉ. शैलेंद्र पाल सिंह, प्रांतीय महासचिव भारतीय किसान यूनियन
-12500 क्विंटल प्रतिदिन गन्ने की पेराई वाली क्षमता की साथा चीनी मिल में पिछले चार सालों में नाममात्र की पेराई हुई है। इसके चलते किसानों का गन्ने की खेती से मोह भंग हो गया है।
कुसुम सिंह, किसान निवासी हरदुआगंज
कुसुम सिंह निवासी हरदुआगंज।- फोटो : CITY OFFICE