अतरौली में कल्याण सिंह की अंतिम यात्रा को देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़ ।
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पूर्व सीएम स्व. कल्याण सिंह की अंतिम यात्रा में सोमवार को अलीगढ़ की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। जनसंघ से भाजपा के गठन और सूबे में भाजपा द्वारा 312 सीटें जीतने तक पिछड़ों की राजनीति में अगुवा नेता बन कर उभरे कल्याण को नम आंखों से विदाई दी गई। स्टेडियम से जिले की सीमा तक दर्जनों शोक सभाएं हुई। भीषण गरमी और उमस के बीच भी लाखों समर्थक स्टेडियम से अलीगढ़ सीमा तक 47 किमी लंबे रास्ते पर डटे रहे। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में उनके निधन से अंतिम संस्कार तक लगातार तीन दिन तक साथ रहे। वह स्वयं अंतिम यात्रा हर छोटी बड़ी व्यवस्था करवाते रहे।
कहना गलत न होगा कि ये सब कुछ कल्याण सिंह के करिश्माई व्यक्तित्व और प्रदेश में पिछड़ा वर्ग पर उनकी मजबूत पकड़ की वजह से हुआ, क्योंकि कुछ महीनों बाद ही विधानसभा चुनाव होने है। ऐसे में न तो भाजपा न कोई और दल, पिछड़ा वर्ग को खुश करने कोई भी मौका गंवाना नहीं चाहते। कल्याण की अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाव ने भी बता दिया कि वह आज भी उनकी मंझी हुई राजनीति के कद्रदान हैं। बशर्ते उनकी भी कुछ बातें उसी तरह से सुनी जाएं, जैसे खुद बाबू जी सुनते और तवज्जो देते थे। बहरहाल, शिक्षक से सफल राजनेता बने कल्याण अपने अंतिम सफर से भी भाजपा नेतृत्व को ये संदेश देने में सफल रहे कि पिछड़ों पर मजबूत पकड़ से ही सत्ता की मंजिल पाई जा सकती है। इसी फार्मूले से वह राजनीति के शिखर तक पहुंचे और पार्टी को भी सत्ता में लाए।