आगरा में मोहर्रम का चांद नजर आने के बाद रविवार की शाम को शिया इमामबाड़ों में अलम सजाकर फर्श-ए-अजा बिछा दिए गए। इसके साथ ही मजलिसों का सिलसिला भी शुरू हो गया। शिया समुदाय के लोगों ने रंग-बिरंगे कपड़े त्यागकर काले लिबास धारण कर लिए। महिलाओं ने भी काले लिबास पहनने के साथ जेवरात उतारकर रख दिए।
हजरत इमाम हुसैन और उनके परिजन की कुर्बानियों का जिक्र मजलिसों में मौलानाओं ने शुरू कर दिया। अंजुमन-ए-पंजेतनी के अमीर अहमद एडवोकेट ने बताया कि शिया समुदाय में मुहर्रम का मातम दो माह 8 दिन तक चलता है। इस दौरान निकाह और अन्य खुशी के आयोजन नहीं होंगे। सभी इमामबाड़ों में मुस्लिम विद्वान कर्बला की जंग और हजरत इमाम हुसैन की याद में अपनी तकरीर करेंगे।
दूसरी ओर, कटरा दबकैय्यान स्थित फूलों के ताजिया के इमामबाड़े में फातिहा पढ़ी गई। मुहर्रम की सातवीं तारीख को यहां ऐतिहासिक फूलों का ताजिया रखा जाएगा। तीन दिन तक इसकी जियारत करनेके लिए दूरदराज से लोग पहुंचेंगे।
हिंदुस्तानी बिरादरी के सदर डॉ. सिराज कुरैशी नेबताया कि मंटोला सहित अन्य स्थानों पर भी मजलिसों का आयोजन किया जाएगा। इनमें मौैलाना कर्बला की जंग पर रोशनी डालेंगे। मुहर्रम की पांचवीं तारीख से घरों में भी ताजिये रखे जाते हैं। इसके लिए ताजिये बनाने का काम चल रहा है। कई लोग ताबूत की जियारत भी करते हैं। डाॅ. कुरैशी ने प्रशासन से मांग की है कि न्यू आगरा, पचकुइयां और सराय ख्वाजा कर्बलाओं में व्यवस्थाएं कराए जाने की मांग की है।