खुद भी सॉल्वर बैठाकर बना था अध्यापक
थाना लोहामंडी के प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार के मुताबिक, वीनू ने पूछताछ में बताया कि वह खुद सॉल्वर बैठाकर सहायक अध्यापक बना है। वर्ष 2019 में एक सॉल्वर को बैठाकर अपनी परीक्षा दिलाई थी। इसमें पास हो गया था। वर्ष 2020 में उसकी नौकरी लग गई। वह हिंदी तक ठीक से नहीं लिख पाता है। पुलिस ने उससे एक शब्द लिखाया, लेकिन वो लिख नहीं सका। अब पुलिस उसके शैक्षिक दस्तावेज चेक कर रही है।
कोचिंग के छात्रों को लालच देकर बनाता है सॉल्वर
पुलिस ने बताया कि वीनू तकरीबन छह साल से विभिन्न विभागों में परीक्षा में सॉल्वर बैठा रहा है। वो शिक्षक बनने से पहले निजी तौर पर शिक्षण कार्य करता था। इस दौरान परीक्षार्थियों के संपर्क में आ गया। वहीं कोचिंग में तैयारी करने वाले छात्र भी उसके संपर्क में रहते थे। वो उन्हें रुपयों का लालच देता था। दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने के लिए तैयार करता था।
इसके लिए फिरोजाबाद स्थित आरटीओ ऑफिस के बाहर एक दुकान पर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। प्रवेशपत्र और आधार कार्ड पर अभ्यर्थी के फोटो हटाकर सॉल्वर की फोटो लगाकर तैयार करता था। उसने शिक्षा, पुलिस और न्याय प्रशासन में 30 से अधिक कर्मचारियों की भर्ती इसी तरह कराई है। उसके परिवार में तीन लोगों के पुलिस विभाग में होने की जानकारी मिली है। पुलिस उनके बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस ने मुकदमे से निकाला था नाम
पुलिस ने बताया कि सॉल्वर की मदद से पुलिस, न्याय प्रशासन और शिक्षा विभाग में भर्ती होने वालों की सूची पुलिस को मिल गई है। पुलिस अब नियुक्ति स्थान पर जाकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। सॉल्वर की मदद से जो पास हुआ होगा, उसके खिलाफ विभाग में शिकायत करके कार्रवाई कराई जाएगी।
वर्ष 2015 में पुलिसभर्ती परीक्षा में थाना छत्ता पुलिस ने सॉल्वर को गिरफ्तार किया था। तब वीनू उर्फ महिपाल का नाम सामने आया था। उसका नाम मुकदमे में भी खोला गया था। मगर, पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई थी। मुकदमे से वीनू का नाम निकाल दिया गया था। वीनू के परिवार में पत्नी, बच्चों के साथ ही एक भाई और दो बहन हैं। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है।