आगरा। शहर की हवा फिर से बिगड़ने लगी है। बृहस्पतिवार को संजय प्लेस की हवा रेड जोन में पहुंच गई, जबकि दूसरे नंबर पर आवास विकास कॉलोनी रहा। संजय प्लेस में एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहद खराब श्रेणी में 368 पर पहुंच गया, जबकि आवास विकास कालोनी में 284 दर्ज किया गया। जबकि पूरे शहर का औसत एक्यूआई 248 रहा। शहर में ट्रैफिक जाम, कचरा जलाने के कारण हवा की गुणवत्ता में गिरावट आई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी की गई एयर क्वालिटी इंडेक्स सूची में ताजनगरी में बेहद सूक्ष्म कणों की मात्रा सामान्य से सात गुना ज्यादा दर्ज की गई, वहीं खतरनाक कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा सामान्य से 44 गुना ज्यादा रही।
शहर की हवा
जगह एक्यूआई
संजय प्लेस 368
सेक्टर 3 284
शास्त्रीपुरम 280
मनोहरपुर 194
शाहजहां पार्क 150
शहर से देहात तक जला रहे कचरा
शहर में आवास विकास कॉलोनी, हरीपर्वत, जगदीशपुरा, घटिया आजम खां समेत कई इलाकों में कचरा जलाया जा रहा है, वहीं देहात और शहर से सटे नवविकसित इलाकों में भी कचरा जलाने से निकले काले धुएं के गुबार लोगों की मुश्किल बढ़ा रहे हैं। पथौली नहर पर फ्लाई ओवर के निर्माण के दौरान धूल के गुबार उड़ते नजर आए तो पथौली पुलिस चौकी के सामने ही कचरा जलाया गया। शहर में जगदीशपुरा और बैनारा फैक्टरी के पास कचरा जलाने की लोग लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम ने दिवाली के बाद कचरा जलाने पर पर तीन एफआईआर की थीं, जिसके बाद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
हवा का हाल
तत्व न्यूनतम औसत अधिकतम
पीएम 2.5 330 365 412
पीएम 10 174 284 413
कार्बन मोनोऑक्साइड 53 75 176
सल्फर डाईऑक्साइड 5 21 48
कचरा जलाने पर रोक लगे
प्रदूषण के मामलों में एनजीटी में याचिकाकर्ता और चिकित्सक डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने वाहनों का ईंधन जलने के कारण निकल रहे पीएम 2.5 कणों में कमी लाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि शहर में खोदाई के कारण सड़कें संकरी हो चुकी है, जिनसे वाहनों की स्पीड कम होने के साथ ट्रैफिक जाम लग रहा है, जो पीएम कणों का बड़ा सोर्स है। कचरा जलाने पर पूरी तरह से रोक लगे, इसमें स्मार्ट सिटी के कैमरों की मदद ली जाए। जब पूरे शहर को स्मार्ट सिटी के कैमरों से कवर किया गया है तो डलाबघरों को भी कैमरों की जद में लिया जा सकता है। इससे कचरा जलने से होने वाले प्रदूषण से बचा जा सकेगा। उन्होंने ताजमहल के पास ताजगंज मोक्षधाम में बंद पड़ी चिमनी को चालू कराए जाने की मांग की। इस पर एडीए ने दो करोड़ रुपये खर्च किए थे।