वीरागंना ने बताई मांगें
- शहीद के स्मारक के लिए सरकारी जमीन दी जाए।
- जीवनयापन के लिए खेती करने के लिए जमीन मिले।
- बिजली का निशुल्क कनेक्शन दिलवाया जाए।
- एक दिन का वेतन देने की घोषणा करने वाले सरकारी विभागों के कर्मचारियों से जुटी राशि दिलाई जाए।
- स्मारक द्वार के निर्माण तेजी से कराएं और शहीद के नाम से चौराहा का नामकरण किया जाए।
राजनीतिक जमघट, खूब लगे नारे
आगामी विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां शुरू हो गई हैं। रालोद अध्यक्ष के शहीद के घर जाने को चुनावी स्टंट से जोड़ा जा रहा है। उनके पहुंचते ही राजनीतिक लोगों का जमघट लग गया, कार्यकर्ताओं ने जमकर धक्कामुक्की की। पार्टी और अपने नेता के जिंदाबाद के खूब नारे भी लगाए। पुलवामा कांड के वक्त जयंत परिजनों से मिले थे, लेकिन इसकेबाद ढाई साल में पार्टी को कोई कार्यकर्ता उनके हालचाल तक जानने नहीं पहुंचा।
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