करहल रोड जैन मंदिर में पत्रकार वार्ता के जानकारी देते जैन मुनि।
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मैनपुरी। जैन आचार्य विहसंत सागर महाराज ने कहा कि नए मंदिर के निर्माण से ज्यादा महत्वपूर्ण पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार करना होता है। समय के साथ ही लोगों की धर्म के प्रति आस्था बढ़ रही है। कदम और कलम मिलकर ही धर्म का सही तरीके से प्रचार प्रसार कर सकते हैं।
शनिवार को बिसातखाना स्थित जैन मंदिर के पास पत्रकारों से वार्ता करते हुए आचार्य विहसंत सागर महाराज ने कहा कि अब समाज का धीरे-धीरे विस्तार हो रहा है। ऐसे में पुराने मंदिरों को विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने खुद 21 साल से पुराने मंदिरों के जीर्णोद्धार, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए एक अभियान चलाया है। इसके तहत पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। बिसातखाना स्थित पुराने जैन मंदिर का भी जीर्णोद्धार कराया जाएगा। जिसके लिए वेदी बना दी गई है। तीन साल में मंदिर बनकर पूरा हो जाएगा। एक मंदिर का लाभ 18 किलोमीटर तक के क्षेत्र में रहने वालों को मिलता है।
आचार्यश्री ने कहा जिस देश का राजा धार्मिक प्रवृत्ति का होता है उस देश में सभी धर्मों का सम्मान होता है। राजा ही देश में धार्मिक माहौल बनाता है। भारतीय संस्कृति हमेशा मार्ग दर्शक रही है। आज भी देश में किसी भी स्थान पर खुदाई के दौरान जैन संस्कृति के अवशेष मिलते हैं। इस मौके पर प्रतिज्ञा श्री, प्रेक्षा श्री, परीक्षा श्री, प्रमोद जैन, विशाल जैन जॉली, आदेश जैन, सप्पू जैन, दिलीप जैन, सुशील जैन, प्रभाष चंद्र जैन मौजूद रहे।