मैनपुरी। मंगलवार को श्री अजितनाथ जिनालय कटरा में आचार्य प्रमुख सागर महाराज की शिष्या प्रतिज्ञा श्री, परीक्षा श्री और प्रेक्षा श्री माता जी के सानिध्य में शांति धारा एवं अभिषेक संगीतमय पूजन कराया गया। प्रतिज्ञा श्री ने कहा कि धर्म आत्मा का स्वभाव है। स्वभाव को कभी खोया नहीं जा सकता।
कटरा स्थित श्री अजितनाथ जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान के 43वें दिन भक्तामर विधान करने का सौभाग्य राजेश कुमार शोर्य परिवार को मिला। प्रतिज्ञा श्री माताजी ने कहा कि धर्म आत्मा का स्वभाव है। स्वभाव को कभी खोया नहीं जा सकता। ज्यादा से ज्यादा भुलाया जा सकता है। जैसे आग अपनी गर्मी नहीं खो सकती वैसे ही मानव अपने चेतन स्वभाव को नहीं खो सकता। धर्म एक को जानने पर जोर देता है और विज्ञान अनेक को जानने पर जोर देता है। विज्ञान अनेक को जान कर भी अज्ञानी बना रहता है और धर्म एक आत्मा को जानकर भी ज्ञानी हो जाता है। सांयकालीन गुरु भक्ति एवं आरती भक्तांबर महादीप अर्चना विधान कराया गया। जिसमें जैन समाज के सभी लोगों ने दीप अर्ध समर्पित किए। जिनालय में सांयकालीन धर्म सभा में त्रिमाताजी द्वारा धार्मिक कक्षाओं के द्वारा युवा वर्ग महिलाएं पुरुष और बच्चों को धार्मिक संस्कार भी दिया जा रहे हैं। शाम को प्रश्न मंच प्रतियोगिताएं भी की जा रही है जिससे कि युवा वर्ग धर्म की ओर अग्रसर हो। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रमुख सागर युवा मंच, सचिव महिला मंडल मैनपुरी, पुष्प प्रमुख चातुर्मास समिति का सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन पंडित कमल जैन ने किया।
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दशलक्षण पर्व पापों से दिलाता है छुटकारा: परीक्षा श्री
मंगलवार की दोपहर त्रिमाताओं ने पत्रकारों के साथ वार्ता की। इस दौरान माता परीक्षा श्री ने बताया कि 10 सितंबर से 19 सितंबर तक पर्वराज पर्यूषण दशलक्षण पर्व समारोह शुरू होने जा रहा है। दशलक्षण पर्व पापों से छुटकारा दिलाने का कार्य करता है। 10 दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में व्यक्ति 10 नियमों को अपनाकर पापों से छुटकारा पा सकता है। माता प्रतिज्ञा श्री ने कहा कि जैन धर्म जियो और जीने दो की कला सिखाता है। माता प्रेक्षाश्री ने पत्रकारों को सरस्वती पुत्र बताते हुए उनकी प्रशंसा की। इस अवसर पर श्रवण कुमार जैन, पंडित कमल कुमार जैन, आदेश जैन, प्रमोद जैन, विकास जैन, विशाल जैन पॉली, गौरव जैन, राजीव जैन, गोल्डन जैन, आलोक जैन बॉबी, प्रमुख रूप से उपस्थित थे।