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शिक्षकों ने अवकाश पर रहकर विश्वविद्यालय में धरना प्रदर्शन किया

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आगरा। उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय संघ के बैनर तले एडेड कालेजों के शिक्षकों ने मंगलवार को सामूहिक अवकाश पर रहकर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर में धरना प्रदर्शन किया। इसमें औटा ने अपनी ताकत भी दिखाई। इस दौरान लंबित मांगों को पूरा न करने, पुरानी पेंशन बहाली, शिक्षकों को प्रोफेसर का पदनाम न देने और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर नाराजगी भी जताई। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन कुलसचिव संजीव कुमार सिंह को सौंपा।
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विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी आठों जिलों के शिक्षकों ने धरना प्रदर्शन में हिस्सा लिया। शिक्षकों ने विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदेश सरकार से पुरानी पेंशन की बहाली, प्रोफेसर का पदनाम एवं ग्रेड देने, उच्च शिक्षा के निजीकरण व व्यवसायीकरण पर तत्काल रोक लगाने, मेडिकल एवं अन्य अवकाशों को पहले की तरह अनुमन्य किए जाने, मानदेय और अनुमोदित स्ववित्तपोषित शिक्षकों के विनियमतीकरण, सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष किया जाने की मांग प्रमुखता से रखी।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के निजीकरण से ही शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं। शिक्षकों ने रोष व्यक्त किया कि एक ओर सांसद-विधायक अपनी पेंशन, वेतन सहित अन्य सुविधाएं बढ़ाते जा रहे हैं, वहीं, शिक्षकों को पेंशन रहित कर उनके वृद्धावस्था की लाठी को भी छीना जा रहा है। धरना प्रदर्शन की सभा की अध्यक्षता औटा अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह ने और संचालन महामंत्री डॉ. भूपेंद्र चिकारा ने किया। फुपुक्टा अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान, महामंत्री वाईएन त्रिपाठी के अलावा डॉ. अरुणोदय बाजपेई, डॉ. शशिकांत पांडेय, डॉ. गौरव कौशिक, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ विक्रम सिंह, डॉ. मुकेश भारद्वाज, डॉ संजय यादव, डॉ. अलका सिंह, डॉ. अतीत श्रीवास्तव, डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. पूनम तिवारी आदि ने अपने विचार रखे।
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आगरा। औटा की ओर से डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय स्तर की समस्याओं के भी निराकरण की मांग की। इसमें शिक्षकों को प्रोन्नति कराए जाने, परीक्षा परिणाम में गलतियां होने पर छात्रों के सही परिणाम दोबारा जारी किए जाने, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को स्थगित करते हुए इसके प्रावधानों में स्पष्टता लाने की मांग की है।
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