इस्लामिक कैलेंडर के पहले दिन बुधवार से मुहर्रम की शुरुआत होगी। आगरा के इमामबाड़ों में अलम सजाने के साथ ही जरी (स्थायी ताजिये) भी रखे जाएंगे। मुहर्रम के 10 दिन तक शिया समुदाय के लोग मातम करेंगे। इस दरम्यान निकाह समेत अन्य शुभ कार्य नहीं होंगे। इस बार भी ज्यादातर इमामबाड़ों में ऑनलाइन मजलिसें होंगी।
मुहर्रम का चांद सोमवार को दिखाई नहीं दिया। अब मोहर्रम की शुरुआत 11 अगस्त से होगी। इसी दिन इस्लामिक कैलेंडर का पहला दिन भी होगा। अंजुमन ए पंजेतनी के मीडिया प्रभारी अमीर अहमद एडवोकेट ने बताया कि शाहगंज के चिल्लीपाड़ा, लोहामंडी के इमामबाड़ों में साफ सफाई के बाद अलम सजाए गए हैं। इस बार भी ताजियेदारी नहीं होगी।
जिन इमामबाड़ों में जरी (ताजिए का मॉडल) स्थायी रूप से हैं, उनकी जियारत की जाएगी। कोरोना संक्रमण के कारण केवल 50 लोगों को ही मजलिसों में शिरकत करने की इजाजत है। बुधवार से ही शिया समुदाय में मातम का दौर शुरू हो जाएगा।
हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष डॉ सिराज कुरैशी ने बताया कि ताजियों के जुलूस नहीं निकाले जाएंगे, लेकिन शहर में कुछ घरों में स्थायी ताजिये हैं, जिनकी मोहर्रम के दौरान जियारत की जाएगी। फातिहा पढ़े जाएंगे। उन्होंने बताया कि मुहर्रम की सातवीं से ताजियेदारी की शुरुआत की जाती है, लेकिन यह सिलसिला पिछले साल से ही बंद चल रहा है।