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आगरा में बिटिया की हत्या: पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने दिए थे खौफनाक हत्या के सबूत, पिटाई के बाद दबाया था नाक-मुंह

Sun, 21 Mar 2021 10:44 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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आगरा में बिटिया की हत्या का घटनास्थल - फोटो : अमर उजाला
आगरा में गांव गैलाना के जंगल में किशोरी को बेरहमी से मारा गया था। पिटाई के बाद उसके नाक-मुंह को दबाया गया। दम घुटने से उसकी जान चली गई। इसके बाद उसे घसीटकर तालाब में डाला गया। उसके चेहरे पर पांच जगह चोट के निशान मिले हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। शनिवार को किशोरी के शव का डाक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। इसमें पता चला कि उसकी मौत दम घुटने से हुई थी। उसका मुंह और नाक को दबाया गया। इसके अलावा चेहरे पर चोट थीं। यह उसे घसीटने से आई होगी। उसकी कोहनी सहित शरीर में कई जगह मामूली खरोंच हैं। उसका पूरा शरीर मिट्टी से सना हुआ था। यह मिट्टी तालाब और जंगल की थी। 

 
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बिटिया की हत्या के बाद मौके पर पहुंचे एसएसपी व एसपी सिटी - फोटो : अमर उजाला
हमें इंसाफ चाहिए, बेटी की हत्या करने वाले को हो फांसी 
हमारी बिटिया सबसे प्यारी थी। कभी घर से अकेले बाहर नहीं जाती थी। उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। जिसने भी ऐसा किया है, उसे फांसी की सजा होनी चाहिए। हमें इंसाफ चाहिए। शनिवार को गांव में पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने पर मृतक किशोरी के माता-पिता ने यही मांग की। मां बार-बार बेहोश जाती हैं। वह एक ही बात कहती हैं कि बेटी को एक बार उनके पास ला दो। 
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बिटिया की हत्या के बाद मौके पर डाग स्क्वैड व पुलिसटीम - फोटो : अमर उजाला
किशोरी की हत्या की घटना के बाद गांव में शनिवार को भी चूल्हे नहीं जले। परिवार में करुण क्रंदन गूंज रहा था। ग्रामीणों का कहना था कि आरोपी जल्द से जल्द पकड़े जाने चाहिए। गांव में इस तरह की घटना पहली बार हुई है। उधर, मृतका के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। 
 

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सुलभ शौचालय - फोटो : अमर उजाला
पांच हजार की आबादी में एक सार्वजनिक शौचालय 
गांव गैलाना की आबादी पांच हजार है। एक हजार से ज्यादा परिवार रहते हैं। तकरीबन सौ घरों में ही निजी शौचालय बने हैं। बाकी परिवारों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। इसके बावजूद एक ही सार्वजनिक शौचालय है। यह भी काफी पुराना है।
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आगरा में बिटिया की हत्या के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अफसर - फोटो : अमर उजाला
गांव के राममूर्ति ने बताया कि सैकड़ों परिवारों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। इनमें महिलाएं और बच्चियां भी होती है। कई परिवार काफी गरीब हैं। इस कारण वह घरों में शौचालय नहीं बना पा रहे हैं। उत्तम सिंह का कहना था कि गांव में एक सार्वजनिक शौचालय है। वह भी 100 मीटर की दूरी पर है। लोग दूर जाने के बजाय जंगल में खुले में शौच करने पर मजबूर हो जाते हैं। गांव के सुरेंद्र और बच्चू सिंह ने बताया कि कई बार प्रशासन और क्षेत्रीय पार्षद से शौचालय बनाने की मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद शौचालय नहीं बढ़ाए गए हैं। 
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