एडीजीसी सुभाष गिरि ने कोर्ट में दस गवाह और सुबूत पेश करते हुए अभियुक्त के अपराध को जघन्य और समाज के लिए कलंकित बताते हुए फांसी की सजा की दलील दी। पुलिस पैरोकार गजेंद्र गौतम ने गवाह और साक्ष्य पेश कर सराहनीय कार्य किया।
बच्चे देश का भविष्य, अभियुक्त को समाज में खुला नहीं छोड़ सकते : कोर्ट
कोर्ट ने अपने निर्णय में टिप्पणी की है कि इतनी छोटी बच्ची, जो लिंग भेद भी नहीं जानती और निश्चल भाव से किसी की भी गोद में चली जाती है। मृतका अबोध बच्ची थी, उसे अभी पूरा जीवन जीना था।
यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि बच्ची को अभियुक्त ने दुष्कर्म के बाद जब मारने के लिए उल्टा लटकाकर पानी में डुबोया होगा, तब बच्ची पर क्या बीती होगी। बच्चे देश का भविष्य हैं। उनके साथ इस तरह का खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। ऐसे अभियुक्त को समाज में खुला नहीं छोड़ा जा सकता है।