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UP: ई-रिक्शा की बैटरी में ब्लास्ट, जल उठा घर... धधकती आग में जिंदा जल गई महिला, पति की हालत नाजुक

Tue, 09 Apr 2024 05:54 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

ई-रिक्शा की बैटरी में ब्लास्ट हो गया। इससे घर में आग लग गई। लपटों में फंसकर महिला जिंदा जल गई। जबकि पति की हालत नाजुक है। 
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इन्वर्टर की बैटरी में ब्लास्ट, जल उठा घर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा में बीती रात ई-रिक्शा की बैटरी में ब्लास्ट हो गया। बैटरी फटी तो निकली चिंगारी से घर में आग लग गई। आग में एक महिला जिंदा जल गई। जबकि पति गंभीर रूप से झुलस गया। उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

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घटना ताजगंज थाना क्षेत्र के नगला पैमा गांव की गांव निवासी किशन उर्फ मधुआ (45) पत्नी गीता (40) के साथ एक कमरे के घर में रहता है। इलाके के पूर्व पार्षद जगमोहन सिंह ने बताया कि कुछ साल पहले ट्रेन हादसे में किशन के दोनों पैर कट गए थे। वह बैटरी रिक्शा चलाकर परिवार का पालन पोषण कर रहा था। 
 

दिव्यांग होने के कारण चारपाई से न उठ सका

ग्रामीणों ने बतााया कि सोमवार मंगलवार तड़के करीब 3 बजे आग ई-रिक्शा की दो बैटरी में शार्ट सर्किट से आग लग गई। अनुमान है कि बैटरी चार्जिंग के दौरान शार्ट सर्किट होने से आग लगी। कुछ देर बाद बैटरी धमाके के साथ फट गई। दिव्यांग होने के कारण किशन चारपाई से नहीं उठ सका। लपटों से घिरने के बाद गीता ने पति को बचाने में लग गई। इसी दरम्यान पति को बाहर निकल आया मगर वह खुद फंसकर रह गई। 
 

आसपास के लोगों ने बिजली आपूर्ति बंद करके आग बुझाई। इसके बाद दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस मंगवाई। लेकिन ताजमहल के पूर्वी गेट से रास्ते पर प्रतिबंध होने के कारण एंबुलेंस को आने में वक्त लग गया। सूचना पर दमकल कर्मी भी पहुंच गए। दोनों को इलाज के लिए एसएन अस्पताल गया, जहां मंगलवार दोपहर को गीता ने दम तोड़ दिया। किशन का इलाज किया जा रहा है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।

बच गई बेटे की जान

ग्रामीणों ने बताया कि किशन का इकलौता 16 वर्षीय बेटा घर के पास छप्पर में अपने चाचा के साथ सो गया था। रोजाना वह भी कमरे में सोता था। इस कारण बेटे की जान बच गई।
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ताजमहल की बंदिशों के कारण देरी से पहुंची एंबुलेंस, रोष

घटना के बाद नगला पैमा के ग्रामीणों में रोष है। उनका कहना है कि ताजमहल के पूर्वी गेट की ओर से वाहन निकलने की अनुमति नहीं है। चार पहिया वाहनों को 8 किमी घूम कर निकलना पड़ता है। किसी तरह की अनहोनी पर लोग दोपहिया वाहन पर ही मरीज को ले जा सकते हैं। कई बार इसके चलते इलाज में देरी हो जाती है। अगर एंबुलेंस समय पर आ जाती तो शायद गीता की जान बचाई जा सकती थी।
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