फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मथुरा: हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना वित्त एवं लेखाधिकारी को पड़ी भारी, जानिए क्या हुआ

Wed, 13 Oct 2021 12:14 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, मथुरा

सार

ग्रेच्युटी भुगतान से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी को भारी पड़ गई। संतोषजनक जवाब नहीं देने पर अधिकारी काफी देर कठघरे में खड़े रहे। बाद में उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से ग्रेच्युटी भुगतान करने का लिखित आश्वासन दिया, तब वहां से जाने की अनुमति मिली। 

 
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ग्रेच्युटी के भुगतान से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना मथुरा के वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक को भारी पड़ गई। कोर्ट की नाराजगी को देख कठघरे में खड़े वित्त एवं लेखाधिकारी के हाव-भाव उड़ गए। उनके अधिवक्ता ने लिखित में भुगतान करने का आश्वासन दिया। इसके बाद ही कोर्ट से वित्त एवं अधिकारी को जाने की अनुमति मिली।

विज्ञापन


नौहझील विकासखंड के आजनौंठ विद्यालय में कार्यरत हरेकृष्णा की सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। उनके द्वारा अपने जीवित रहते 60 वर्ष में सेवानिवृत्ति का विकल्प पत्र नहीं भरा गया था। इस पर उनकी पत्नी ने ग्रेच्युटी लेने के लिए आवेदन किया तो बेसिक शिक्षा विभाग ने विकल्प पत्र न भरने की स्थिति में ग्रेच्युटी देने से इंकार कर दिया। 

पीड़ित ने लगाई थी हाईकोर्ट से गुहार 
इस आदेश के विरोध में मृतक की पत्नी मुनेश देवी हाईकोर्ट इलाहाबाद की शरण ली। उच्च न्यायालय ने मुनेश देवी के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग को ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश दिया। इसके बावजूद भी विभाग द्वारा पीड़ित पक्ष को भुगतान नहीं किया गया। इस पर पीडि़त ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। 

विज्ञापन
विज्ञापन

इस याचिका पर अक्तूबर को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट में पेश हुए मथुरा के वित्त एवं लेखाधिकारी राहुल यादव ने विभागीय आदेश का हवाला देते हुए ग्रेच्युटी का भुगतान करने में असमर्थता जाहिर कर दी। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। 

सामाजिक परिवर्तन रथयात्रा: बांकेबिहारी के दर से शिवपाल का चुनावी शंखनाद, कहा- सूबे में माफिया राज, किसानों पर हो रहा अत्याचार

वित्त एवं लेखाधिकारी राहुल यादव ने कोर्ट में अपने अधिवक्ता के माध्यम से लिखित मामले का निस्तारण करते हुए पत्रावली संयुक्त निदेशक कोषागार एवं पेंशन आगरा को भेजने का आश्वासन दिया। इसके बाद ही उन्हें कोर्ट से राहत मिल सकी।


अपने शहर की खबरों से अपडेट रहने के लिए पढ़ते रहिए amarujala.com । अमर उजाला आगरा के फेसबुक पेज को लाइक और फॉलो करने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं। 

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें