लखनऊ के संग्रहालय में है शिलालेख
ब्रिटिश इंजीनियर एलेक्जेंडर कनिंघम को पुरातत्व सर्वे के दौरान बटेश्वर में एक शिलालेख मिला था, जो लखनऊ संग्रहालय में है। यह शिलालेख संवत 1212 आश्विन शुक्ल पंचमी, दिन रविवार का है। इसके अनुसार यहां बटेश्वर में राजा परमर्दिदेव ने स्फटिक के समान सफेद पत्थर का एक सुंदर मंदिर बनवाया था। शिलालेख के 25, 26 और 34 वे श्लोक में लिखा है कि उस राजा परमार्दिदेव ने राज प्रासाद बनवाया था, जिसमें भगवान विष्णु की प्रतिमा थी, जिनके चरणों में वह प्रतिदिन नत मस्तक होता था।
विदेशी इतिहासकारों ने बताया आलीशान नगर
ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी राजस्थान नामक पुस्तक में यूनानी यात्री मेगस्थनीज कृत एरियन के आधार पर शौरीपुर और बटेश्वर का उल्लेख किया है। लिखा है कि यमुना के दाहिने तट पर बसा यह समृद्धिशाली सुंदर व्यापारिक शहर है। ब्रिटिश इतिहासकार कार्ट लार्ड भी यहां आए, उन्होंने यहां खोज की और फिर लिखा कि किसी जमाने में यह बहुत आलीशान नगर रहा होगा। इतिहासकार कार्लाइल ने 1870 में बटेश्वर में सिक्के, बर्तन, ताम्रपत्र, शिलालेख निकाले थे।