कासगंज। बढ़ती जनसंख्या पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सीफार के सहयोग से परिवार नियोजन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के माध्यम से परिवार नियोजन के लाभ एवं अपनाए जाने वाले साधनों के बारे में जानकारी दी गई।
एसीएमओ डा1 एसपी सिंह ने कहा कि परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की सक्रिय भागीदारी सबसे बड़ी जरूरत है, क्योंकि पुरुष नसबंदी महिला नसबंदी की अपेक्षा बहुत ही सरल और आसान है । इसका कोई दुष्प्रभाव भी शरीर पर नहीं पड़ता है, इसलिए किसी भी भ्रम में पड़े बगैर पुरुष वर्ग आगे आये और परिवार पूर्ण होने पर नसबंदी की सेवा का लाभ उठाए। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसँख्या दर के बीच संतुलन बनाने के लिए जनसँख्या स्थिरीकरण आज के समय की बड़ी जरूरत है ।
इसके लिए सभी सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों पर परिवार नियोजन की सेवाओं व सुविधाओं को प्रदान किया जा रहा है । समुदाय में आशा व अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से परिवार नियोजन के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है । आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर योग्य व लक्षित दम्पति से संपर्क कर उनकी लाइन लिस्टिंग करती हैं। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन का मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है ।अपने व बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए दो बच्चों के जन्म में तीन साल का अंतर जरूर रखें और परिवार जब पूर्ण हो जाए तो नसबंदी की सेवा का लाभ जरूर उठाएं
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आकाश सिंह ने कहा कि परिवार नियोजन के लिए परिवार नियोजन के साधनों को अपनाना जरूरी है। बच्चों के जन्म में अंतर रखने के लिए ओरल पिल्स, आईयूसीडी प्रसव पश्चात/गर्भ समापन पश्चात्, त्रैमासिक गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा, हार्मोनल गोली छाया व कंडोम की सुविधा हर स्वास्थ्य केन्द्रों पर मुफ्त उपलब्ध है इस मौके पर डीसीपीएम केपी सिंह, डीपीएम पवन कुमार, अर्बन हेल्थ को-ऑर्डिनेटर मोहम्मद युसुफ, यूनिसेफ से डीएमसी अनुराग दीक्षित, चाई संस्था से विजय गर्ग, स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी और सीफार के प्रतिनिधि उपस्थित रहे ।