तहसील में एंटीकरप्शन टीम ने सहायक चकबंदी अधिकारी को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया। उसने एक महिला से जमीन की पैमाइश करने के लिए दस हजार रुपये मांगे थे। खबर लिखे जाने तक टीम थाने में मुकदमा दर्ज कराने और घर पर छापा मारने की कार्रवाई में जुटी थी।
मामला शुक्रवार दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे का है। कानपुर की एंटीकरप्शन की सीओ निहारिका शर्मा के नेतृत्व में कानपुर और आगरा की टीम तहसील पहुंची। सीओ ने बताया कि गांव नगला महासिंह निवासी प्रेमवती पत्नी राजकुमार को कांस्टेबल अनीता के साथ पांच हजार रुपये लेकर सहायक चकबंदी अधिकारी तेजबहादुर यादव के पास भेजा। प्रेमवती ने सहायक चकबंदी अधिकारी को पांच हजार रुपये दिए। कहा कि अब पैमाइश शुरू करा दो। जवाब मिला कि एक-दो दिन में करा दूंगा। इसके बाद टीम पहुंची और तेजबहादुर की तलाशी ली तो जेब से पांच हजार रुपये मिले, जिन पर पाउडर लगा था। सीओ निहारिका शर्मा ने बताया कि मूलरूप से बासंडी बलिया निवासी तेजबहादुर आगरा में रहते हैं। शिकायतकर्ता प्रेमवती ने बताया कि नगला महासिंह मायके में उन्हें 22 बीघा जमीन मिली है। इसमें आठ हिस्सेदार हैं। गाटा संख्या दो के रकवा की पैमाइश के लिए डीएम के यहां प्रार्थनापत्र दिया था। जिस पर आदेश के बाद भी पैमाइश नहीं कराई थी। 15 दिन पहले तेजबहादुर यादव ने पैमाइश के एवज में दस हजार रुपये मांगे थे। इसकी शिकायत डीएम से की थी।
टीम के सदस्यों के मोबाइल नंबर लिए
तहसील में सुविधा शुल्क का खेल चरम पर है। सूत्रों की मानें तो कई लोगों ने अन्य रिश्वतखोरों को पकड़वाने के लिए टीम के सदस्यों के मोबाइल नंबर लिए।