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सांप्रदायिक हिंसा की आंच में झुलस सकते हैं अफसर भी

Sat, 05 Sep 2015 02:21 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा।
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शमसाबाद में गुरुवार को हुए बवाल के पीछे मुख्य रूप से थाना पुलिस जिम्मेदार रही, लेकिन शुक्रवार को हिंसा की आंच देहात तक फैली तो यह चूक आला अफसरों की रही। कस्बे के बिगड़े हालात सामान्य होने से पहले ही अधिकारी रात में अपने घर लौट आए थे। जरूरत वहीं पर रुककर माहौल पर नजर रखने की थी। अफसरों के जाते ही पुलिस भी आराम की मुद्रा में आ गई। नतीजा यह रहा कि बलवाइयों को धर्मस्थलों को निशाना बनाने का मौका मिल गया।
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अगर बलवाइयों की गिरफ्तारी के प्रयास ठीक से किए गए होते तो हालात इतने नहीं बिगड़ते। अगर अफसर रात में कस्बा में ही रुककर ताबड़तोड़ दबिश डलवाते तो पुलिस का खौफ रहता। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। रास्तों की नाकाबंदी भी नहीं की गई थी। कस्बा से बलवाई बड़े आराम से मोटरसाइकिलों से गांवों की ओर निकले। उनके हाथ में हथौड़े और सब्बल भी थे। इसके बावजूद पुलिस को पता नहीं चला।
कस्बा से सटे मिश्रित आबादी वाले गांवों में पुलिस लगाने की जिम्मेदारी भी अफसरों की थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि शासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है। इसमें यह भी पूछा गया कि बलवे के पीछे किस किसकी लापरवाही रही। पहले दिन के बवाल में थाना पुलिस की लापरवाही सामने आने पर भी कोई एक्शन नहीं लिया गया।
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अफवाहों ने आग में घी डाला
एक तो माहौल खराब था, दूसरा अफवाह खूब फैली। पुलिस पूरी तरह बेबस नजर आई। बवाल को लकर सोशल मीडिया पर भी दिन भर कई झूठी सूचनाएं चलती रहीं।
अफवाहों पर ध्यान नहीं दें: एसएसपी
एसएसपी राजेश डी मोड़क ने लोगों से अपील की है कि वे किसी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं दें। कुछ लोग अफवाहें फैलाकर अमन चैन बिगाड़ना चाहते हैं। त्योहार का सीजन है। लोग किसी के बहकावे में नहीं आएं। शमसाबाद में शांति है। पुलिस प्रशासन अफवाह फैलाने वालों पर भी कार्रवाई करेगा।
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