आगरा के क्वारंटीन सेंटर्स में व्याप्त अव्यवस्थाओं से शासन संतुष्ट नहीं है। कहीं शौचालय नहीं, तो कहीं स्नानगार। ऐसे में अगर कोरोना संक्रमण फैला, तो सीधे जिलाधिकारी (डीएम) जिम्मेदार होंगे। मुख्य सचिव ने सभी जिलों के डीएम व कमिश्नर (मंडलायुक्त) को पत्र लिख क्वारंटीन सेंटर्स के हालात सुधारने के लिए चेताया है।
संस्थागत क्वारंटीन सेंटर मानकों पर खरे नहीं उतर रहे। सामाजिक दूरी का पालन नहीं हो रहा। ऐसे में अगर क्वारंटीन से संक्रमण का प्रसार हुआ तो इससे शासन की छवि खराब होगी।
मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने आगरा समेत सभी जिलों के डीएम व कमिश्नर को समय रहते क्वारंटीन सेंटर्स के हालात सुधारने व मानकों के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चेताया है। पत्र में लिखा है डीएम सभी क्वारंटीन सेंटर्स का निरीक्षण करें। कमिश्नर, डीएम के निरीक्षण के बाद सेंटर्स की समीक्षा कर नियमित रिपोर्ट शासन को भेजे हैं।
28 दिन बाद भी क्वारंटीन से नहीं छोड़े, न जांच हुईं
क्वारंटीन में 14 से 21 दिन रखने का प्रावधान है, लेकिन आगरा के कई क्वारंटीन सेंटर्स में 28 दिन बाद भी लोग रहने को मजबूर हैं। उन्हें खाना-पीना तो छोड़िए, जांच तक नहीं हो पा रही। ऐसे में क्वारंटीन में रह रहे लोग अब इन्हें यातनागृह का नाम दे रहे हैं।
इस संबंध में जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने कहा कि बीते सात दिनों में 650 से अधिक लोगों ने क्वारंटीन पीरियड पूरा किया है। जिन लोगों की 21 दिन बाद भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई हैं। उन्हें क्वारंटीन में 14 दिन और रहना पड़ेगा। क्वारंटीन से सिर्फ उन्हीं लोगों को छोड़ा जा रहा है जिनकी तीन रिपोर्ट निगेटिव आई है। जिले में 21 क्वारंटीन सेंटर्स हैं, इनमें फिलहाल 226 लोग क्वारंटीन हैं।
'क्वारंटीन में तय हो अधिकारियों की जवाबदेही'
कमिश्नर अनिल कुमार ने रविवार को मेडिकल क्वारंटीन व संस्थान क्वारंटीन सेंटर्स के अलावा आश्रय स्थलों के लिए भी डीएम को नोडल अधिकारी नामित करने के आदेश दिए हैं। कमिश्नर ने कहा क्वारंटीन में तैनात अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
उन्होंने कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए समीक्षा बैठक में नए क्वारंटाइन सेंटर के लिये माउंट लिट्रा स्कूल, फतेहाबाद रोड तथा ग्लोबल आगरा कांवेन्ट स्कूल, को चिह्नित करने की बात कही। उन्होंने क्वारंटाइन सेंटरों का नियमित निरीक्षण के आदेश सीएमओ को दिए हैं।