मैनपुरी। मुख्यमंत्री के आदेश पर प्रदेश भर की मंडियों को कब्जामुक्त करने के लिए अभियान चलाया गया, लेकिन मैनपुरी की नवीन मंडी में अवैध कब्जाधारकों पर कार्रवाई नहीं हो सकी। यहां कब्जों को चिह्नित करने के बाद ही कार्रवाई रुक गई। इसके चलते धड़ल्ले से मंडी में अवैध कब्जे जारी हैं।
मैनपुरी की नवीन मंडी धान के कारण प्रदेश की बड़ी मंडियों में शामिल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सालभर पहले मंडियों में किए गए अवैध कब्जे हटाने के आदेश दिए थे। इसके बाद मंडियों में अभियान चलाया गया। मैनपुरी की मंडी में भी कब्जा कर बनाई गईं पक्की दुकानों और टिनशेड की दुकानों को चिह्नित किया गया। इस दौरान चिह्नित स्थानों पर लाल रंग से क्रॉस का चिह्न भी बनाया गया। आढ़तियों को अवैध निर्माण हटाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया, लेकिन सालभर बीतने के बाद भी अवैध कब्जे नहीं हट सके हैं।
---
मंडी समिति को हो रहा नुकसान
अवैध दुकानों से मंडी समिति को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। दरअसल मंडी समिति दुकानों का निर्माण कर उनका आवंटन खुली नीलामी के माध्यम से करती है। इसमें तीन से चार लाख रुपये की लागत से तैयार होने वाली दुकान की बोली सात से नौ लाख रुपये तक लगती है। अवैध कब्जा करने वालों ने मंडी समिति को कोई धनराशि नहीं चुकाई है।
---
चबूतरों पर बना लीं दुकानें
आढ़तियों ने मंडी के नीलामी चबूतरे भी नहीं छोड़ा। इन नीलामी चबूतरों का निर्माण इसलिए हुआ था कि किसान यहां अपनी फसल का ढेर लगा सकें। लेकिन इन पर भी अवैध निर्माण कर लिया गया है।
---
पूर्व में अवैध कब्जे चिह्नित करने का काम किया था। कब्जा हटाने के लिए आढ़तियों को चेतावनी दी गई थी। जल्द ही अभियान चलाकर कब्जे हटवाए जाएंगे।
-नवीन कुमार कोहली, मंडी सचिव