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एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल: आगरा में ऑटो और ई-रिक्शा पर लेकर जानी पड़ीं प्रसूताएं

Mon, 26 Jul 2021 03:30 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

सरकारी एंबुलेंस की हड़ताल से चिकित्सकीय सेवाएं चरमरा गईं। प्रसूताओं को ऑटो और ई-रिक्शा से घर जाना पड़ा। प्रसव के लिए आने वाली गर्भवतियों को भी भाड़े के वाहन पर लाना पड़ा। 
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अस्पताल पर एंबुलेंस का इंतजार करते मरीज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा जिले में सरकारी 90 एंबुलेंस संचालित हैं। इसमें गर्भवती-प्रसूताओं के लिए 40 एंबुलेंस 102 सेवा, 48 एंबुलेंस दुर्घटना में घायलों को लेकर जाने वाली 108 सेवा और एडवांस लाइफ सपोर्ट की दो एंबुलेंस संचालित हैं। समायोजन, स्थायी नियुक्ति, ठेका प्रथा बंद करने, कोरोना योद्धा घोषित करने समेत पांच मांगों के लिए सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इससे शहर और देहात की एंबुलेंस सेवा ठप होने से मरीजों को परेशानी हुई। 

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कलक्ट्रेट में ज्ञापन देकर की नारेबाजी
जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 सेवा के स्टाफ ने सभी एंबुलेंस लेडी लॉयल में खड़ी करने के बाद कलक्ट्रेट में डीएम के यहां ज्ञापन दिया। वापस आने के बाद लेडी लॉयल में नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद सिंह और महामंत्री रविंद्र सिंह ने कहा कि मांग पूरी न होने तक हड़ताल जारी रहेगी। शरद यादव, प्रभात यादव, मुलायम सिंह, गुमान सिंह आदि रहे। 

केस एक: 
हड़ताल है ऑटो से चले जाओ

सेवला के मुकेश कुमार अपनी पत्नी के प्रसव के बाद एंबुलेंस चालक के पास गए, तो उसने बताया कि आज हड़ताल है, हम नहीं जाएंगे। ऐसे में ऑटो से अपनी पत्नी और नवजात को लेकर गए। 

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350 रुपये में ऑटो किया
धनौली के नरेश कुमार पत्नी और नवजात को लेडी लॉयल से घर लेकर जाने के लिए 350 रुपये का ऑटो करना पड़ा। इन्होंने बताया कि हड़ताल के कारण कोई भी एंबुलेंस लेकर नहीं गया। 

ई-रिक्शा में लेकर गए प्रसूता
दौरेठा की अफसाना आधा घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करती रहीं, हड़ताल की जानकारी पर पति  इस्लाम, ई-रिक्शा किराए पर करके ले गए। बताया कि 400 रुपये भाड़ा देना पड़ा।  

एंबुलेंस नहीं मिली तो ऑटो से आए
खेरिया मोड़ के वेदपाल सिंह ने बताया कि एंबुलेंस की हड़ताल से परेशानी हुई। 500 रुपये भाड़े पर ऑटो लेकर आए, तब पत्नी और नवजात को लेकर घर पर पहुंचे। 
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वैकल्पिक व्यवस्था करे प्रशासन
दौरेठा के इस्लाम खान ने कहा कि एंबुलेंस की हड़ताल पर प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करानी चाहिए, एंबुलेंस नहीं मिली तो भाड़े के वाहन पर पत्नी और नवजात को घर लेकर गया। 

घंटे भर इंतजार के बाद भी नहीं मिली एंबुलेंस
फिरोजाबाद से आए परवेश ने कहा कि घंटे भर तक गेट पर बैठकर एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, जब पता चला कि एंबुलेंस की हड़ताल है तो भाड़े के वाहन पर अपने मरीज को लेकर जाना पड़ा।
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