बरसाना (मथुरा)। बरसाना कस्बे से पांच किमी दूर है राधा की सखी सुदेवी का गांव सुनहरा। राधा की प्रमुख अष्ट सखियों में सबसे छोटी सखी सुदेवी जब सितार का वादन करती तो श्रीकृष्ण झूम उठते। सितार वादन में निपुण सुदेवी का यह गांव पूर्व में स्वर्णपुर वन के नाम से जाना जाता था। सुदेवी सखी प्रिया-प्रियतम की जलपान सेवा किया करती थीं। इनका जन्म भाद्रपद की शुक्लपक्ष चतुर्थी को हुआ था।
गोरेलाल पर्वत पर सुदेवी सखी का मंदिर स्थित है। मंदिर के चारों तरफ हरियाली है। मंदिर की शिखर दो किलोमीटर दूर से ही दिखाई पड़ती है। रसिकों की वाणी के अनुसार एक बार सुदेवी सखी सितार वादन कर रही थीं तभी उनकी उस ध्वनि को सुनकर योगीराज श्रीकृष्ण बरबस ही उनकी ओर खिंचे चले आए। वहां पहुंचकर योगीराज श्रीकृष्ण आनंद से झूमने लगे।
मंदिर के महंत माधव नारायण दास ने बताया कि 23 सितंबर को सुदेवी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जन्मोत्सव से संबंधित सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। इस पवित्र स्थान के लिए दुर्भाग्य की बात यह है कि राजस्थान में आने के कारण इस स्थली को पूर्ण रूप से ब्रजभूमि जैसी सुविधाएं मुहैया नहीं हो पाती हैं।
राधारानी से छह दिन छोटी हैं सुदेवी सखी
सुदेवी सखी राधारानी की सबसे छोटी सखियों में आती हैं। यह राधारानी से छह दिन छोटी थीं। इनकी माता का नाम कलावती एवं पिता का नाम गौरभानु था। सुदेवी सखी की बहन रंगदेवी थीं। दोनों के एक से रूप देख लोग भ्रम में पड़ जाते थे कि यह सुदेवी हैं या रंगदेवी।