गाजियाबाद में बहला-फुसलाकर एक किशोरी को घर से बुलाकर उसके मंगेतर के
सामने ही तमंचे की नोक पर गैंगरेप करने के दो आरोपियों को एडीजे कोर्ट ने
दोषी ठहराया है।
न्यायाधीश शंकर लाल ने दोषियों को दस-दस साल का कारावास और 25 हजार रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई है। खास बात यह है कि इस मामले में पीड़िता बाद में अपने पूर्व के बयानों से मुकर गई थी, मगर कोर्ट ने उसके पूर्व के बयानों को ही आधार मानकर सजा सुना दी। कोर्ट ने पीड़िता को पक्षद्रोही करार देते हुए उसके खिलाफ अलग से मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
सरकारी वकील प्रमोद कुमार तंवर ने बताया कि मामला लोनी थाना क्षेत्र का है। घटना 28 मार्च 2011 की है। इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति ने शिकायत की थी कि वह 40 दिन के लिए जमात पर गया हुआ था। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले दो युवक उसकी 15 वर्षीया बेटी को बहला-फुसलाकर ले गए और उसके मंगेतर के सामने ही तमंचे के बल पर रेप कर दिया।
पुलिस में इसकी शिकायत की गई, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में कोर्ट के माध्यम से 156/3 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ।
सरकारी वकील ने बताया कि इस मामले में पीड़िता और उसके मां-बाप के बयान कोर्ट के समक्ष दर्ज किए गए थे। हालांकि बाद में पीड़िता अपने पूर्व के बयानों से मुकर गई थी।
कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए पूर्व में आरोपियों के खिलाफ दिए गए पीड़िता के बयान को ही आधार माना और दोनों का सजा सुना दी।