लखनऊ। गाजीपुर में एचएएल के सामने मंडी के पास शुक्रवार रात शार्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। आग से कपड़े, बर्तन, राशन व सब्जी की दुकानों समेत करीब पैंतीस दुकानें जल कर राख हो गई। आग के चपेट में आने से एक बाइक, पांच ठेले व पांच साइकिलें भी जल गई हैं। आग लगने से खबर से इलाके में भगदड़ मच गई। आसपास के लोग दुकान व घरों से निकल कर सड़क पर निकल आए। सूचना पर आठ दमकल के वाहन मौके पर पहुंच गए। दमकलकर्मियों ने ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हादसे में एक करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान बताया जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक, गाजीपुर थाना क्षेत्र के एचएएल के सामने मंडी लगती है। मंडी में बांस के ट्टर से घेरकर रेडीमेड कपड़े, बर्तन व सब्जी की दुकानें लगाई जाती हैं। रात करीब दस बजे अचानक व्यवसायी बाबू अग्रहरि के रेडीमेड कपड़े की दुकान में आग लगी। बताया जा रहा है कि आग शार्ट सर्किट से लगी। दुकानदारों ने दुकान से धुआं निकलते देखा। मगर, जब तक वह कुछ समझ पाते आग ने दुकान को अपने चपेट में लिया और आग की लपटें आसमान छूने लगी। थोड़ी देर में आग ने आस पड़ोस के बर्तन दुकान राजू जैन, रेडीमेड कपड़े की दुकान लगाए पप्पू गुप्ता समेत लक्ष्मी जायसवाल, यादव वस्त्रलोक, छेदीलाल गुप्ता, अभय मिश्र, बाबू राम गुप्ता व राहुल गुप्ता की दो दुकानों समेत 15 दुकानों अपने चपेट में लिया। यही नहीं आग के चपेट में सब्जी मंडी भी रही। आग से सब्जी की दुकानें लगाए राम सेवक समेत 20 सब्जी दुकानदारों की दुकानें जल कर स्वाहा हो गई। आग के चपेट में आने से एक बाइक, पांच ठेले व पांच साइकिलें भी जल गई हैं। भीषण आग की खबर पूरे इलाके में फैल गई। इलाके में भगदड़ मच गई। सूचना पर गाजीपुर, चौक व हजरतगंज से आठ दमकल के वाहन आ गए। इलाके बिजली उड़ा दी गई। दमकलकर्मियों ने आग बुझाने के प्रयास शुरू किए। मगर, अंधेरा होने के चलते उन्हें करीब ढाई घंटे कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। आग से करीब एक करोड़ का नुकसान बताया जा रहा है।
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फूट-फूट कर रोए गरीब दुकान
भीषण आग ने कई गरीबों के पेट का निवाला छीन लिया। उनका सब कुछ बार्बद हो गया। नुकसान से गरीब दुकान फूट-फूटकर रोए। सब्जी दुकान राम सेवक का कहना है कि उनकी सारी कमाई चली गई। दुकान ही कमाई का जरिया थी। बर्बादी देखकर सब्जी विक्रेता राजू कश्यप के आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उसने कहा कि आज ही उसने कर्जा लेकर मंडी से हजारों की सब्जियां खरीदी थी। आग से सब जलकर खाक हो गई। इसी तरह बीस सब्जी विक्रेता की दुकानें जलकर राख हो गई।
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पक्की दुकानें मिल गई होती तो नुकसान से बच सकते थे दुकानदार
दुकानदार राहुल गुप्ता की मानें तो एचएएल के सामने मंडी में स्थापित दुकानदारों को पक्की दुकानें दिलाने का मामला कोर्ट में गया था। वर्ष 1992 में नगर निगम ने दुकानदारों को पक्की दुकानें न मिलने तक अस्थाई तौर पर काबिज रहने के आदेश दिए थे। बीस साल बाद भी दुकानदारों को पक्की दुकानें नहीं मिली। दुकानदारों का कहना है कि यदि दुकानें मिल गई होती तो इस नुकसान से बच जाते।
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सिलेंडर फटने से हड़कंप
आग से दुकानों में रखे सिलेंडर भी चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो दुकान में रखे एक छोटा सिलेंडर फट गया। सिलेंडर फटने की आवाज से इलाका गूंज गया। आग ने एक और सिलेंडर को अपने दायरे में लिया। मगर, एक दमकलकर्मी ने सिलेंडर को खंीचकर पानी में फेंक दिया। आग से बिजली के तार, टेलीफोन के तार भी जल गए।