लखनऊ। गैस के केवाईसी फॉर्म की तरह अब जल्द ही सभी शहरवासियों को निवास प्रमाण के लिए केवाईआर (नो योर रेजीडेंट) फॉर्म भरना पड़ेगा। एनपीआर (राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर) में नाम दर्ज कराने के लिए मार्च मध्य तक यह प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद राष्ट्रीय पहचान का प्रमाण माना जाने वाला आधार कार्ड भी तभी बनेगा, जब एनपीआर में नाम दर्ज हो।
जिलाधिकारी कार्यालय में बुधवार को इस संबंध में कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें नगर निगम व जिला प्रशासन के अधिकारियों को विशेष रूप से बुलाया गया था। कार्यशाला के बाद अपर नगर आयुक्त पीके श्रीवास्तव ने कहा कि एनपीआर के लिए तैयारी की जा रही है और राजधानी में मार्च मध्य तक इसमें नाम दर्ज करने का काम शुरू हो जाएगा। इस काम में उन्हीं कर्मचारियों (प्रगणकों) को लगाया जाएगा, जो पूर्व में जनगणना के कार्य में लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि उन लोगों को भी केवाईआर फॉर्म भरना होगा, जिनका आधार कार्ड बन चुका है। एनपीआर में नाम दर्ज करने के लिए आधार कार्ड की तर्ज पर ही आंख की पुतलियों, दोनों हाथ की सभी उंगलियों की पहचान ली जाएगी और फिर उस डाटा को बंगलुरू स्थित केंद्र में भेजा जाएगा।
नाम दर्ज कराने के लिए देने होंगे यह प्रमाणपत्र
एनपीआर में नाम दर्ज कराने वाले व्यक्ति को पहचान के प्रमाण के तौर पर पहले से मान्य राशन कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, शस्त्र लाइसेंस, पैन कार्ड आदि में से किसी एक प्रमाण पत्र को फॉर्म के साथ लगाना होगा।