लखनऊ। आस्था के आगे हादसे का जख्म फीका है। इसका उदाहरण बृहस्पतिवार को चारबाग स्टेशन पर महाकुंभ में वसंत पंचमी के स्नान के लिए जा रहे श्रद्धालुओं के उत्साह में दिखा। श्रद्धालुओं में मौनी अमावस्या पर हुए हादसे का थोड़ा भी खौफ नहीं था। कोई पूरे परिवार के साथ ट्रेन के इंतजार में डटा था तो कोई अपनी मित्र मंडली के साथ। ट्रेनों में हो रही भीड़ की भी उन्हें परवाह नहीं थी। बृहस्पतिवार को चारबाग स्टेशन पर इलाहाबाद जाने वाले बहुत से यात्री गंगा गोमती एक्सप्रेस का प्लेटफॉर्म नंबर आठ पर इंतजार करते नजर आए। इलाहाबाद स्पेशल ट्रेन में बैठे अनिल (18) और राघवेंद्र (20) ने बताया कि ‘स्कूल में वसंत पंचमी के मौके पर छुट्टी है तो महाकुंभ स्नान की योजना बना ली। हम महाकुंभ मेला देखने के लिए बहुत उत्साहित हैं और उसका पूरा मजा लेंगे।’
फैजाबाद निवासी अजय पत्नी राप्ति के साथ ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘बेटे अंश का मुंडन है और हमने मन्नत मांगी थी कि जब हमें पुत्र प्राप्ति होगी तो हम उसका मुंडन इलाहाबाद में गंगा तट कर करवाएंगे।’
गंगा मैया के जयकारे से छपी लाल चुनरी और नंगे पैर जब मुरादाबाद निवासी राम सरीक (58) किसान एक्सप्रेस से उतरे तो सब उनका मुंह ताकते रह गए। राम सरीक ने कहा कि ‘इलाहाबाद में हुई घटना से हमें कोई डर नहीं है। वसंत पंचमी के मौके पर गंगा में डुबकी लगाकर हर हाल में आशीर्वाद लेना है।’ इलाहाबाद में पहले से मौजूद श्रद्धालु वसंत पंचमी पर उमड़ने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए वापस भी आ रहे हैं। नई दिल्ली जाने के लिए खड़ी शताब्दी ट्रेन से गाजियाबाद जाने वाले विप्रो में इंजीनियर राहुल मलिक (26) ने कहा कि ‘महाकुंभ में बहुत मजा आया और गंगा स्नान के दौरान तो मुझे ठंड तक नहीं लगी। मैं बुधवार को इलाहाबाद पहुंचा था और स्नान के बाद एक रात वहां रुका। लखनऊ आया और अब वापस दिल्ली जा रहा हूं।’
इलाहाबाद से वापसी के बाद चारबाग स्टेशन की छोटी लाइन से चेन्नई जाने वाली ट्रेन का इंतजार कर रहे मुत्थू और पी सेलबम ने कहा कि ‘हम हिंदू हैं और महाकुंभ हमारे देश का सबसे बड़ा मेला है तो इसमें हमें जाना चाहिए। इससे हमें अपने कल्चर के बारे में पता चलता है।’
भीड़ सुने तब तो कुछ कहें ः स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की भारी भीड़ को नियंत्रित करते हुए आरपीएफ के जवान सुरेंद्र यादव (27) ने बताया कि अव्यवस्था के लिए भीड़ भी कई बार जिम्मेदार होती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई सुनने और समझने को तैयार हो तब तो कुछ कहा जाए। लोग यात्रियों के उतरने से पहले चढ़ने लगते हैं तो अव्यवस्था तो होगी ही।
कई ट्रेनें रद्द, यात्री परेशान ः स्टेशन पर भीड़ और ट्रेनों के रद्द होने से कई यात्री इधर-उधर भटकते रहे। ट्रेन संख्या 12179, लखनऊ-आगरा इंटरसिटी एक्सप्रेस अचानक रद्द कर दी गई। वहीं ट्रेन संख्या 64324, लखनऊ बाराबंकी एक्सप्रेस के रद्द होने से दैनिक यात्रियों समेत दूसरे यात्री परेशान रहे। कानपुर से आने वाली पैसेंजर भी अचनाक रद्द कर दी गई। ट्रेन संख्या 4370, त्रिवेणी एक्सप्रेस का मार्ग बदलने से स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। इस ट्रेन को लखनऊ से वाया रायबरेली, इलाहाबाद होते हुए शक्तिनगर भेजा गया।
आलमबाग बस अड्डे पर सामान्य भीड़ ः इधर, आलमबाग बस अड्डे पर इलाहाबाद जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ सामान्य रही लेकिन दूसरे स्थानों को जाने वाले यात्री थोड़े परेशान दिखे। रूट पर बसों की सर्विस कम होने से उन्हें देर तक इंतजार करना पड़ रहा था। देवरिया के सूरज कुमार बस अड्डे पर दोपहर दो बजे ही आ गए थे और वो गाजीपुर से आने वाले अपने दोस्त दीनदयाल का इंतजार कर रहे थे। दोस्त के आने के बाद ही वे बस से इलाहाबाद जाने वाले थे। उन्होंने कहा कि ट्रेनों में मारामारी है, इसीलिए बस से जा रहे हैं। किराया ज्यादा है लेकिन ट्रेन से बस में ज्यादा आराम है। बसों में भीड़ के सवाल पर नजीबाबाद बस डिपो के कंडक्टर अशफाक कहते हैं कि भीड़ तो उस रूट पर है जहां से ये बसें हटाई गई हैं। अशफाक बताते हैं कि हर रूट से कम से कम 40 बसें कुंभ के लिए चल रही हैं। ऐसे में एक तरफ आराम है तो दूसरी तरफ परेशानी। नजीबाबाद बस डिपो के ड्राइवर अमरकांत कहते हैं कि नजीबाबाद रूट पर 55 बसें चलती थीं और आज सिर्फ 17 चल रही हैं। इसके बावजूद कमाई पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। अभिषेक श्रीवास्तव इलाहाबाद जाने वाली बस का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीकॉम का सर्टिफिकेट लेना है और कल उनके दोस्त का बर्थ-डे भी है। इसी वजह से उन्होंने इलाहाबाद जाने की योजना बना ली। काम के साथ-साथ गंगा स्नान भी हो जाएगा और महाकुंभ दर्शन भी।