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यादों में: जब आधुनिक ओलंपिक के जनक कूबरटिन का 1892 में लिखा मैनिफेस्टो 62.40 करोड़ में हुआ नीलाम

Thu, 22 Jul 2021 11:26 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कूबरटिन के 14 पेज के मैनिफेस्टो के लिए रिकॉर्ड 62.40 करोड़ रुपये की बोली लगाई गई थी। यह नीलामी न्यूयॉर्क के सोदबी ऑक्शन हाउस में हुई थी, जो करीब 12 मिनट तक चली थी।
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पियरे डि कुबर्टिन - फोटो : twitter
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विस्तार
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आधुनिक ओलंपिक के जनक और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के दूसरे अध्यक्ष पियरे डी कूबरटिन खेलों में सुधार के लिए जाने जाते थे। उन्होंने दुनियाभर में ओलंपिक खेलों को पहुंचाने का काम किया था। हालांकि फ्रांसीसी नागरिक कूबरटिन को कई बार आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा था। बावजूद इसके ओलंपिक में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। यही कारण रहा कि उनका 1892 में लिखा मैनिफेस्टो 2019 में बड़ी रकम के साथ नीलाम हुआ था। 

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कूबरटिन के 14 पेज के मैनिफेस्टो के लिए रिकॉर्ड 62.40 करोड़ रुपये की बोली लगाई गई थी। यह नीलामी न्यूयॉर्क के सोदबी ऑक्शन हाउस में हुई थी, जो करीब 12 मिनट तक चली थी। सोदबी के मुताबिक, नीलामी शुरू होने के 12 मिनट में ही मैनिफेस्टो बिक गया था। नीलामी में अनुमान से करीब 8 गुना ज्यादा राशि मिली। 

बता दें कि फ्रांस के कूबरटिन ने खिलाड़ियों से सामाजिक और व्यक्तिगत तौर पर फायदे के लिए प्रयास करने की अपील की थी। उन्होंने 1894 में अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आईओसी) की स्थापना की। इसके बाद 1896 में एथेंस में पहले आधुनिक ओलिंपिक गेम्स कराए। उनका मानना था कि खेल भी इंसान के जीवन का अहम हिस्सा हैं। वह विश्व शांति के लिए खेलों को अहम मानते थे और दुनिया को खेल के माध्यम से जोड़ना चाहते थे। 
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हालांकि उनकी यह स्पीच उस वक्त लोगों को अधिक पसंद नहीं आई थी क्योंकि लोग उनकी बातों को व्यावहारिक नहीं मानते थे। लेकिन बीतते समय के साथ-साथ उनकी सोच सही साबित होती गई। यही कारण है कि 1896 में जहां इसमें 12 देश शामिल थे वहीं इस बार के ओलंपिक में 200 से अधिक देश जुड़ रहे हैं।
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