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उत्तरायण पर्व पर देवताओं की प्रातःकालीन वेला होती है आरम्भ, जानिए महत्व

Sat, 13 Jan 2024 10:57 AM IST
विनोद शुक्ला पं.जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य

सार

भगवान सूर्य का पवित्र पृथ्वी तत्व की राशि मकर में प्रवेश सभी राशियों के जातकों के लिए हमेशा मंगल कारी रहता है। बारह महीनों में केवल यही एक माह ऐसा है जिसमे सूर्य किसी भी राशि के जातक को कष्ट नहीं देते वरन उसे तपश्चर्या के लिए प्रेरित करते रहते हैं।
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भारतीय ज्योतिष मनीषी किसी भी जातक की जन्मकुंडली का फलादेश करते समय कुंडली में सूर्य की स्थिति का गंभीरता से विचार करते हैं। - फोटो : iStock
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विस्तार
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सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही देवताओं का सूर्योदय हो जाएगा और जब ये मेष राशि में गोचर करेंगे तो देवों अभिजित मुहूर्त की भी शुरुआत हो जायेगी। सूर्य के सहयोग से ही ब्रह्माजी सृष्टि का सृजन करते हैं। शास्त्र कहते हैं कि- सूर्य रश्मितो जीवोभि जायते। अर्थात् सूर्य की किरणों से ही जीव कि उत्पत्ति होती है। शिव जी कहते हैं, हे शिवा ! ब्रह्मा विष्णु: शिवः शक्तिः देव-देवो मुनीश्वरा। ध्यायन्ति भास्करं देवं शाक्षीभूतं जगत्त्रये। अर्थात् तीनों लोकों के शाक्षीभूत ब्रह्मा, विष्णु, शिव, शक्ति सभी देवता, योगी ऋषि, मुनि आदि भगवान सूर्य का ही ध्यान करते हैं। इनके बाएं पैर को उत्तरायण और दाहिने पैर को दक्षिणायन रूप में कहा गया है। ये ही ऐसे देवता हैं जो केवल जलदान अथवा अर्घ्य आदि देने से ही शीघ्र प्रशन्न हो जाते हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी पूजन सामग्री की भी आवश्यकता नहीं, केवल एक अंजलि जल श्रद्धाभाव से अर्पित करके इन्हें प्रसन्न किया जा सकता है।

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ज्योतिष में सूर्य की उपयोगिता
भारतीय ज्योतिष मनीषी किसी भी जातक की जन्मकुंडली का फलादेश करते समय कुंडली में सूर्य की स्थिति का गंभीरता से विचार करते हैं। क्योंकि, सप्त दोषं रविर्रहन्ति शेषादि उत्तरायणे। कुंडली में यदि अकेले सूर्य ही बलवान हों तो सात ग्रहों का दोष अकेले शमन कर देते हैं और ये यदि उत्तरायण भी हों तो आठ ग्रहों का दोष शमन कर देते हैं। इसीलिए शास्त्र सभी प्राणियों को भगवान सूर्य को जल-अर्घ्य देने कि सलाह देते हैं। जो मनुष्य प्रातः काल स्नान करके सूर्य को जल का अर्घ्य देते हैं उन्हें किसी भी प्रकार के ग्रहदोष से डरने कि आवश्यकता नहीं है। ऐसा करने से इनकी सहस्रों किरणों में से प्रमुख सात किरणें जिनका रंग बैगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल है हमारे शरीर को नयी उर्जा और आत्मबल प्रदान करते हुए हमारे पापों का शमन करती हैं। इन किरणों के नाम सुषुम्णा, हरिकेश, विश्वकर्मा, सूर्य, रश्मि, विष्णु और सर्वबन्धु है।

सम्पूर्ण जगत के मूल भगवान सूर्य का पवित्र पृथ्वी तत्व की राशि मकर में प्रवेश सभी राशियों के जातकों के लिए हमेशा मंगल कारी रहता है। बारह महीनों में केवल यही एक माह ऐसा है जिसमे सूर्य किसी भी राशि के जातक को कष्ट नहीं देते वरन उसे तपश्चर्या के लिए प्रेरित करते रहते हैं। अपने द्वारा किये गए शुभ-अशुभ कर्मों का प्रायश्चित करने के लिए यह माघ माह और मकर राशिगत सूर्य का होना अच्छा अवसर है। सभी जीवात्माओं को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।

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