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Mokshada Ekadashi 2023: आज मोक्षदा एकादशी पर मिलेगी श्रीहरि विष्णु की कृपा, बस करें इन मंत्रों का जाप

Fri, 22 Dec 2023 11:02 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

22 दिसंबर को प्रातः 08:16 मिनट से एकादशी की तिथि शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 23 दिसंबर को प्रातः 07:11 मिनट पर हो जाएगा।मोक्षदा एकादशी की पूजा में कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से श्री हरि विष्णु प्रसन्न होंगे। 
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मोक्षदा एकादशी मन्त्र जाप - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Mokshada Ekadashi 2023 Mantra Jaap: आज यानी 22 दिसंबर को प्रातः 08:16 मिनट से एकादशी की तिथि शुरू हो चुकी है और इस तिथि का समापन अगले दिन 23 दिसंबर को प्रातः 07:11 मिनट पर हो जाएगा। हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व है। साल में 24 एकादशी तिथियां होती हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह की 11वीं तिथि को एकादशी कहते हैं। एकादशी तिथि को पूरी तरह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दिन भगवान् विष्णु की पूरे श्रद्धा भाव से पूजा की जाती है और भोग अर्पित किया जाता है। महीने में एक एकादशी कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में पड़ती है। प्रत्येक एकादशी तिथि का अलग महत्व है और प्रत्येक एकादशी तिथि में विष्णु पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है। इन्ही एकादशी तिथियों में से एक है मोक्षदा एकादशी। इस बार मोक्षदा एकादशी  22 दिसंबर, शुक्रवार के दिन पड़ रही है। मोक्षदा एकादशी की पूजा में कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से श्री हरि विष्णु प्रसन्न होंगे और आपको उनकी कृपा प्राप्त होगी। 

श्री विष्णु महामंत्र 

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श्री विष्णु भगवते वासुदेवाय मंत्र
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय

विष्णु गायत्री मंत्र
नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

सुख समृद्धि के लिए  मंत्र 
शांता कारम भुजङ्ग शयनम पद्म नाभं सुरेशम।
विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम।
लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म।

धन प्राप्ति के लिए मंत्र
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।।

लक्ष्मी विनायक मंत्र 
दन्ता भये चक्र दरो दधानं,
कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृता ब्जया लिंगितमब्धि पुत्रया,
लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।

विष्णु के पंचरूप मंत्र

ॐ अं वासुदेवाय नम:।।
ॐ आं संकर्षणाय नम:।।
ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:।।
ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:।।
ॐ नारायणाय नम:।।
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ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।

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