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Geeta Jayanti 2023: गीता जयंती कल, जानिए गीता पाठ करने के लाभ और नियम

Thu, 21 Dec 2023 02:15 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

गीता में लिखी गई बातें श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुए संवाद है। ये एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी उत्पत्ति स्वंय श्रीकृष्ण के श्रीमुख से हुई है। इस दिन गीता का पाठ करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-संपन्नता आती है।
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geeta jayanti 2023: शास्त्रों के अनुसार जिस घर में नियमित रूप से गीता का पाठ किया जाता है वहां सुख-समृद्धि बनी रहती है और बुरी शक्तियां दूर हो जाती हैं।
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विस्तार
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Geeta Jayanti  2023: 22 दिसंबर को साल 2023 की अंतिम एकादशी मोक्षदा एकादशी मनाई जाएगी। मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने से प्राणी सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होता है और नरक में गए पितरों को इस व्रत के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन पाण्डु पुत्र अर्जुन को मनुष्य का जीवन सार्थक बनाने वाली गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इस तिथि को गीता जयंती के नाम से भी जाना जाता है। गीता में लिखी गई बातें श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुए संवाद है। ये एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी उत्पत्ति स्वंय श्रीकृष्ण के श्रीमुख से हुई है। इस दिन गीता का पाठ करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-संपन्नता आती है।

गीता पाठ करने के फायदे

  • शास्त्रों के अनुसार जिस घर में नियमित रूप से गीता का पाठ किया जाता है वहां सुख-समृद्धि बनी रहती है और बुरी शक्तियां दूर हो जाती हैं। गीता में धर्म, कर्म, नीति, सफलता, सुख और लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र छुपे हुए हैं इसलिए पठन-पाठन से जीवन की हर समस्या का हल प्राप्त हो सकता है।
  • गीता का पाठ करने से व्यक्ति का आत्मबल मजबूत होता है और वह हर परिस्थिति का मुकाबला कर सकता है।
  • आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोग यदि नियमित रूप से गीता का पाठ करें तो उनकी यह समस्या दूर होने लगती है,घर पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
  •  मानसिक परेशानी और गृह क्लेश से मुक्ति, शत्रु का सामना करने की शक्ति गीता पाठ करने से प्राप्त होती है। इसमें लिखे श्लोक व्यक्ति को जीवन वास्तविकता से अवगत कराते हैं।
  • गीता का नित्यप्रति पाठ करने से घर का वास्तुदोष दूर होता है। घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

घर में गीता रखने के नियम

  • यदि आप श्रीमद्भागवत गीता ला रहे हैं तो आपको केवल गीता ही नहीं घर की पवित्रता पर भी ध्यान रखना जरूरी है। अगर पूजा का कमरा अलग है तो वहां जूते-चप्पल या चमड़े का कोई भी सामान न ले जाएं और ऐसा कोई भी काम न करें जिससे घर की पवित्रता भंग हो।  
  • श्रीमद्भागवत गीता को कभी खुला नहीं रखना चाहिए। गीता को हमेशा लाल कपड़े से लपेट कर रखना चाहिए। केवल पढ़ते समय ही इसे हटाना चाहिए।  
  •  गीता बहुत पवित्र ग्रंथ है इसलिए भूलकर भी इस ग्रंथ को अपवित्र हाथ या नहाए बिना न छुएं।
  • अगर आप श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करते हैं तो इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें कि पढ़ते समय बीच में न उठें यानी कोई भी अध्याय अधूरा न पढ़ें। एक अध्याय पूरा होने के बाद दूसरे अध्याय दूसरे दिन पढ़ सकते हैं। एक अध्याय को बीच में छोड़ना शुभ नहीं माना जाता।  
  • श्रीमद्भागवत गीता एक पवित्र ग्रंथ हैं, जिसे सीधे जमीन पर या अन्य कहीं नहीं रखना चाहिए।  इसे हमेशा काठ यानी लकड़ी के स्टैंड पर रखना चाहिए। किसी भी धर्म ग्रंथ को जमीन पर रखना अशुभ माना जाता है और ऐसा करने से लाइफ में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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