16 दिसंबर को सूर्य नारायण धनु राशि में प्रवेश कर रहे हैं। धनु संक्रांति से मकर संक्रांति तक की अवधि को खरमास कहा जाता है। इस दौरान कोई भी मांगलिक कर्म नहीं किए जाते हैं,ये समय पूजा-पाठ,पवित्र नदियों में स्न्नान,दान एवं सूर्य पूजा के लिए बहुत ही उत्तम माना गया है। अतः खरमास के दिनों में सूर्य उपासना करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि,मान-सम्मान मिलता है एवं सभी रोगों से मुक्ति मिलती है।
सूर्य पूजा का महत्व
शास्त्रों के अनुसार सूरज नारायण को सुबह नमस्कार करने से आयु,आरोग्य,धन धान्य,क्षेत्र,पुत्र,मित्र,तेज,वीर्य,यश,कांति,विद्या,वैभव और सौभाग्य आदि प्राप्त होता है एवं सूर्यलोक की प्राप्ति होती हैं। अनेक शोधों से स्पष्ट हुआ है कि प्रातःकालीन उगते सूर्य को जल अर्घ्य देने से व सूर्य को जल की धार में से देखने पर नेत्रों की ज्योति बढ़ती है। भविष्य पुराण के ब्राह्म पर्व में श्रीकृष्ण और सांब के संवाद बताए गए है। सांब श्रीकृष्ण के पुत्र थे। इस अध्याय में श्रीकृष्ण ने सांब को सूर्य देव की महिमा बताई है। श्रीकृष्ण ने सांब को बताया कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ सूर्य की पूजा करता है,उसे ज्ञान की प्राप्ति होती है। स्वयं मैंने भी सूर्य की पूजा की और इसी के प्रभाव के दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई है।
ऐसे करें पूजा
सुबह स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें,इसमें चावल, लाल फूल एवं गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। जल अर्पित करने के बाद सूर्य मंत्र का जाप करें। सूर्य मंत्र - ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ भास्कराय नम:, ऊँ आदित्याय नमः, ऊँ दिनकराय नमः, ऊँ दिवाकराय नमः, ऊँ खखोल्काय स्वाहा इन मंत्रों का जाप करना चाहिए। उपासना में धूप, दीप जलाएं और सूर्य का पूजन करें। इसके अलावा शुभ फलों की प्राप्ति के लिए सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान करें। इनकी आराधना करने अथवा जल द्वारा अर्घ्य देने से सभी दोष नष्ट हो जाते हैं।
पाप नाशक और पुण्य वृद्धि कारक भगवान सूर्य को इस मंत्र- 'सूर्यदेव महाभाग ! त्र्योक्य तिमिरापह। मम पूर्व कृतंपापं क्षम्यतां परमेश्वरः।को पढ़ते हुए अर्घ्य देने से आयु, विद्या बुद्धि और यश की प्राप्ति होती है।उत्तम स्वास्थ्य, शिक्षा, संतान और यश-कीर्ति की प्राप्ति, सामाजिक प्रतिष्ठा, प्रतियोगिता में सफलता, करियर में कामयाबी के लिए लोगों को प्रातः उदय होते लाल सूर्य की आराधना करनी चाहिए। जिनको बार-बार चोट लगती हो, शरीर में कैल्शियम की कमी हो, दुर्घटना के शिकार अधिक होते हों या फिर अपनी जान जाने का भय हो, यदि वे दोपहर 'अभिजीत' मुहूर्त में सूर्य की आराधना करें तो उन्हें बहुत लाभ होगा। संध्याकाल में सूर्य की आराधना करने से प्राणी को जीवनपर्यंत अन्न-जल एवं भौतिक वस्तुओं का पूर्णसुख मिलता है।
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