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सावन में शिव पूजा: जानिए भोलेनाथ की पूजा में उनकी प्रिय चीजें और क्या भूलकर भी न चढ़ाएं

Tue, 27 Jul 2021 06:35 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सावन का महीना खासतौर पर कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष फलदायी होता है, इसमें अच्छे वर की कामना पूरी होती है। भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए इस महीने शिव भक्त गंगाजल और दूध-दही से अभिषेक करते हैं। इसके अलावा बेलपत्र और कई तरह के फल फूल भी अर्पित किए जाते हैं।
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सावन सोमवार 2021: भोले भंडारी के प्रिय फूल और मंत्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सावन का पवित्र माह शुरू हो चुका है। इस बार सावन का महीना 22 अगस्त तक रहेगा। ऐसे में पूरा महीना शिव भक्ति में बीतेगा। शिव मंदिरों में शिव भक्तों की भीड़ एकत्रित रहेगी। पूरे माह शिवजी और माता पार्वती की विशेष पूजा आराधना की जाएगी। सावन का महीना खासतौर पर कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष फलदायी होता है, इसमें अच्छे वर की कामना पूरी होती है। भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए इस महीने शिव भक्त गंगाजल और दूध-दही से अभिषेक करते हैं। इसके अलावा बेलपत्र और कई तरह के फल फूल भी अर्पित किए जाते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि शिव उपासना में किन-किन चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए और कौन सी चीजें नहीं आइए जानते हैं।

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शिवजी की प्रिय चीजें

बिल्व और शमी पत्र
भगवान भोले भंडारी को बिल्व पत्र बहुत ही प्रिय होता है। मान्यता है जो भी शिवलिंग पर नियमित रूप से बिल्व पत्र चढ़ाता है उसकी हर तरह की मनोकामना पूरी होती है। इसके अलावा भगवान शिव को शमी के पत्ते पसंद होते हैं इसलिए सावन के हर दिन शिवलिंग पर शमी के पत्ते जरूर चढ़ाएं।

दूध और गंगाजल
भगवान शिव का दूध और गंगाजल से अभिषेक करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि जब समुद्र मंथन के दौरान विष निकला था तब भगवान शिव ने देवताओं और सृष्टि की रक्षा के लिए स्वयं विषपान किया था। इस कारण से उनके कंठ में जोरदार जलन पैदा हो गई जिसको शांत करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने दूध और गंगाजल उस जलन को शांत किया था। इसी कारण से भगवान शिव दूध और गंगाजल बहुत ही प्रिय होता है। 

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जल
सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से पहले सूर्य देव को जल चढ़ाएं इसके बाद शिवमंदिर जाकर तांबे के पात्र में गंगाजल में सफेद चंदन मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।

धतूरा
शिवजी को  भी काफी पसंद होता है इसलिए शिवजी की कृपा पाने के लिए इसे जरूर चढ़ाएं।

बेला, चमेली और कनेर पुष्प
भगवान को कनेर, बेला और चमेली का फूल बहुत ही प्रिय होता है। बेला के पुष्पों से पूजन करने पर भगवान शिव, विवाह करने की इच्छा रखने वालों को मनोनुकूल वर और वधू प्रदान करते हैं। चमेली के सुगन्धित पुष्पों से शिव की पूजा करके मनुष्य वाहनों को उपलब्ध करता है। चमेली के फूल चढ़ाने से अच्छे वस्त्रों की अभिलाषा पूरी होती है।

गन्ने का रस
सावन के महीने में शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से जीवन में सभी तरह की सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

भूलकर भी शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये चीजें

हल्दी 
हल्दी का संबंध भगवान विष्णु और सौभाग्य से है इसलिए यह भगवान शिव को नहीं चढ़ता है।

तुलसी 
भगवान शिव पर कभी भी तुलसी का पत्ता नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि भगवान शिव ने तुलसी के पति असुर जलंघर का वध किया था।

तिल
यह भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं अर्पित किया जाना चाहिए। 

टूटे हुए चावल
भगवान शिव को अक्षत यानी साबूत चावल अर्पित किए जाने के बारे में शास्त्रों में लिखा है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिव जी को नही चढ़ता।
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कुमकुम
यह सौभाग्य का प्रतीक है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं इसलिए शिव जी को कुमकुम नहीं चढ़ता।

शिव मूल मंत्र-

ॐ नमः शिवाय॥

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनानत् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्

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