फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mokshada Ekadashi 2023: क्यों इतनी खास है मोक्षदा एकादशी? जानिए इस व्रत को करने के लाभ और पौराणिक कथा

Fri, 22 Dec 2023 09:45 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद

सार

पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी तिथि 22 दिसंबर 2023 को प्रातः 08:16 पर शुरू होगी और समापन 23 दिसंबर 2023 को सुबह 07:11 मिनट पर होगा। इस बार मोक्षदा एकादशी 22 दिसंबर को मनाई जाएगी।
विज्ञापन
मोक्षदा एकादशी 2023: सनातन धर्म में एकादशी व्रत बहुत ही पवित्र, शांतिदायक और पापनाशक माना गया है। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Mokshada Ekadashi 2023: सनातन धर्म में एकादशी व्रत बहुत ही पवित्र, शांतिदायक और पापनाशक माना गया है। मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है। पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी तिथि 22 दिसंबर 2023 को प्रातः 08:16 पर शुरू होगी और समापन 23 दिसंबर 2023 को सुबह 07:11 मिनट पर होगा। इस बार मोक्षदा एकादशी 22 दिसंबर को मनाई जाएगी। मोक्षदा एकादशी पर भगवान श्री नारायण के निमित्त व्रत रखना, विधि-विधान से पूजा करना, पवित्र नदी में स्नान करने से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है और पितरों को मोक्ष मिलता है। इसलिए इसे पुण्यदायिनी और मोक्षदायिनी एकादशी माना गया है।

विज्ञापन


इसलिए खास है यह एकादशी
द्वापर युग में योगेश्वर श्री कृष्ण ने इस दिन अर्जुन को मनुष्य का जीवन सार्थक बनाने वाली गीता का उपदेश दिया था। गीता जैसे महान ग्रंथ का प्रादुर्भाव होने के कारण इस दिन को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। गीता का ज्ञान हमें दुःख, क्रोध, लोभ व अज्ञानता के दलदल से बाहर निकालने के लिए प्रेरित करता है। सत्य,दया,प्रेमऔर सत्कर्म को अपने जीवन में धारण करने वाला प्राणी ही मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।

व्रत करने के लाभ

  • धर्म-शास्त्रों के अनुसार मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से पूर्वजों को उनके कर्मों के बंधन से मुक्ति मिलती है, व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं।
  • भक्ति-भाव से किए गए इस व्रत के प्रभाव से प्राणी सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होता है।
  • इस दिन श्रीमदभगवत गीता की सुगंधित फूलों से पूजा कर,गीता का पाठ करना चाहिए। गीता पाठ करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होकर उसे धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • मोक्ष प्रदान करने वाली यह एकादशी मनुष्यों के लिए चिंतामणि के समान समस्त कामनाओं को पूर्ण कर बड़े-बड़े पातकों का नाश करने वाली है।
  • भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को मोक्षदा एकादशी का महत्व समझाते हुए कहा है कि इस एकादशी के माहात्म्य को पढ़ने और सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
  • इस व्रत को करने से प्राणी के जन्म-जन्मांतर के पाप क्षीण हो जाते हैं तथा जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

पौराणिक कथा

विज्ञापन

पदमपुराण में वर्णित इस एकादशी की कथा के अनुसार पूर्व काल की बात है, वैष्णवों से विभूषित परम रमणीय चंपक नगर में वैखानस नाम के राजा रहते थे।वे अपनी प्रजा का पुत्र की भांति पालन करते थे। एक रात राजा ने सपने में अपने पितरों को नीच योनियों में पड़ा देखा, जो उनसे उन्हें नरक से मुक्ति दिलाने को कह रहे थे।उन सबको इस अवस्था में देखकर राजा के मन में बड़ा विस्मय हुआ और प्रातः काल ब्राह्मणों को  उन्होंने उस स्वप्न के बारे में बताया।ब्राह्मणों के कहने पर राजा पर्वत मुनि के आश्रम में जाकर उनसे मिले। मुनि की आज्ञा से राजा ने अपने पितरों की मुक्ति के उद्देश्य से मोक्षदा एकादशी का विधि-विधान से व्रत किया एवं व्रत का पुण्य अपने समस्त पितरों को प्रदान किया। पुण्य देते ही क्षण भर में आकाश से फूलों की बर्षा होने लगी।वैखानस के पिता पितरों सहित नरक से छुटकारा पा गए और आकाश में आकर राजा के प्रति यह पवित्र वचन बोले-' बेटा!तुम्हारा कल्याण हो।'ये कहकर वे स्वर्ग में चले गए।

साल 2024 आप सभी के लिए कैसा रहेगा? पढ़ें वार्षिक राशिफल 2024
मेष राशिफल 2024 तुला राशिफल 2024
वृषभ राशिफल 2024 वृश्चिक राशिफल 2024
मिथुन राशिफल 2024 धनु राशिफल 2024
कर्क राशिफल 2024 मकर राशिफल 2024
सिंह राशिफल 2024 कुंभ राशिफल 2024
कन्या राशिफल 2024 मीन राशिफल 2024

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें