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Anant Chaturdashi 2024: आज विदा होंगे बप्पा, जानें किस शुभ मुहूर्त में किया जाएगा गणेश विसर्जन

Tue, 17 Sep 2024 10:58 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की अनंत चतुर्दशी तिथि का आरंभ 16 सितंबर को दोपहर 3:10 बजे शुरू हो चुका है और  और 17 सितंबर पूर्वाह्न 11:44 बजे तक जारी रहेगा। तो उदया तिथि के अनुसार आज 17 सितंबर, मंगलवार को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी और आज के दिन ही गणेश जी की विदाई की जाती है।
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गणेश विसर्जन मुहूर्त - फोटो : amar ujala
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Ganpati Visarjan 2024 Shubh Muhurat and Puja Vidhi: गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला गणेशोत्सव आज अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होने जा रहा है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की अनंत चतुर्दशी तिथि का आरंभ 16 सितंबर को दोपहर 3:10 बजे शुरू हो चुका है और  और 17 सितंबर पूर्वाह्न 11:44 बजे तक जारी रहेगा। तो उदया तिथि के अनुसार आज 17 सितंबर, मंगलवार को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी और आज के दिन ही गणेश जी की विदाई की जाती है। गणपति विसर्जन के दिन कई शुभ मुहूर्त हैं जिसमें बप्पा का विसर्जन कर उनकी विदाई की जा सकती है। इस दिन पूरे विधि विधान से बप्पा की पूजा अर्चना करने के बाद शुभ मुहूर्त में विसर्जन किया जा सकता है। आइए जानते हैं बप्पा को विदा करने का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में। 

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गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त 
आज यानी अनंत चतुर्दशी (17 सितंबर 2024) के अवसर पर 4 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ये शुभ चौघड़िया मुहूर्त हैं जिनकी विशेष धार्मिक मान्यता मानी जाती है। मान्यता के अनुसार चौघड़िया मुहूर्त में किए गए विसर्जन कार्य उत्तम फल देते हैं।  
गणपति बप्पा के विसर्जन का पहला शुभ मुहूर्त:  प्रातः 9 बजकर 11 मिनट से दोपहर 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। यह चर, लाभ और अमृत मुहूर्त है। 
अपराह्न मुहूर्त:  दोपहर 3 बजकर 19 मिनट से सायं 4 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। 
सायाह्न मुहूर्त:  सायं  7 बजकर 51 मिनट से रात्रि 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा।  
रात्रि मूहूर्त:  रात्रि 10 बजकर 47 मिनट से तड़के 3 बजकर 12 मिनट (18 सितंबर) तक है। 

गणेश विसर्जन की सम्पूर्ण विधि 
वैसे  तो अनुष्ठान और परंपराओं के आधार पर विसर्जन डेढ़, 3, 5, और 7वें दिन किया जा सकता है।  परंतु अनंत चतुर्थी का दिन गणपति विसर्जन के सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। 

  • गणेश विसर्जन करने के लिए अनंत चतुर्दशी के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और पूजा घर को साफ करें। 
  • इसके बाद गणपति बप्पा का जलाभिषेक करें, उनके मस्तक पर पीला चंदन लगाएं।
  • इसके बाद  पुष्प, अक्षत, फल और दुर्वा आदि बप्पा के समक्ष अर्पित करें। 
  • भोग में बप्पा को मोदक के साथ-साथ लड्डू और नारियल का भोग लगाएं। 
  • अंत में बप्पा को ढोल नगाड़ों के साथ विदा करें और बप्पा से प्रार्थना करें कि बप्पा घर-परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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