आहुति डालते सीएम वीरभद्र सिंह व नेता प्रतिपक्ष प्रो प्रेम कुमार धूमल।
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राजभवन में बनी यज्ञशाला में बुधवार को पहली बार यज्ञ हुआ। इस यज्ञ में राज्यपाल आचार्य देवव्रत, विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल के अलावा सीएम वीरभद्र सिंह व नेता प्रतिपक्ष प्रो प्रेम कुमार धूमल ने एक साथ आहुति डाली। इससे पहले यज्ञशाला का उद्घाटन करने के लिए वीरभद्र सिंह धूमल का हाथ पकड़कर उनके साथ पहुंचे।
यज्ञशाला के बाहर लगी पट्टिका से पर्दा हटाकर उसका उद्घाटन किया। यज्ञ के बाद दोनों काफी समय तक राजभवन में साथ रहे। विधानसभा के अंदर और बाहर धूमल-वीरभद्र के बीच चल रही सियासी खींचतान के बीच इसके अलग अलग मायने निकाले जा रहे हैं।
बुधवार को राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पत्नी तथा रेडक्रास अस्पताल शाखा की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह तथा
विधानसभा के अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल तथा विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल ने राजभवन में आयोजित यज्ञ में भाग लिया। यज्ञ में भाग लेने से पहले सीएम ने राजभवन परिसर में राज्यपाल आचार्य देवव्रत के निर्देश पर बने यज्ञशाला का उद्घाटन किया। यज्ञ के बाद राज्यपाल ने कहा कि वेद व यज्ञ के दौरान मंत्रों के जाप से लोगों व समाज का कल्याण सुनिश्चित होता है तथा यह बाहरी व आंतरिक शांति प्रदान करते हैं।
राजभवन में अब हर रोज होगा यज्ञ
सीएम वीरभद्र सिंह व नेता प्रतिपक्ष प्रो प्रेम कुमार धूमल कुछ इस तरह कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे।
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इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल द्वारा राजभवन में यज्ञशाला का निर्माण एक विशेष पहल है। उन्होंने कहा कि वेद व अन्य ग्रंथों में यज्ञ का उल्लेख मिलता है और आज विश्वभर में यज्ञ विभिन्न तरीकों से लगभग सभी धर्मों व समुदायों द्वारा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन सभी रस्मों का उद्देश्य मानव जाति की खुशहाली, स्वास्थ्य, सम्पत्ति, शांति, शक्ति, शोहरत के लिए तथा प्राकृतिक आपदा व बीमारियों से बचाव के लिए किया जाता है। यज्ञ के बाद राजभवन में राजकीय भोज आयोजित किया गया। इसमें सभी आमंत्रित अतिथियों को शाकाहारी भोजन परोसा गया।
इस दौरान विधानसभा के उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी, मंत्रिमण्डल के सदस्य, मुख्य संसदीय सचिव और विधायकों के अलावा मुख्य सचिव पी मित्रा, डीजीपी संजय कुमार व कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
राजभवन में नवनिर्मित यज्ञशाला में हर दिन वैदिक मंत्रोचार के साथ यज्ञ होगा। वैदिक परंपराओं के पक्षधर राज्यपाल के आह्वान पर यज्ञ की परंपरा शुरू हुई। इससे पहले राज्यपाल बनने के साथ ही उन्होंने शराब परोसने की परंपरा को बंद करा दिया था।