प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने साफ किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में कोई कमी नहीं रखी जाएगी। उन्हें खुशी है कि वह उनके निकटतम मित्रों में से हैं।
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मनाली से विधायक गोविंद सिंह ने पूछा था कि 27 अक्तूबर 2015 को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कुल्लू के ढालपुर स्थित जिस अंतरंग सभागार का शिलान्यास किया था उसके लिए किस भूमि का उपयोग किया गया है।
दरअसल, विधायक का कहना था कि जिस जमीन का इस्तेमाल सभागार के लिए किया जा रहा है, वहां साल 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो प्रेम कुमार धूमल ने अटल जी के नाम पर अटल दशहरा सदन बनाने की घोषणा कर शिलान्यास किया था।
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ऐसे में सरकार अटलजी के नाम व पूर्व मुख्यमंत्री धूमल के नाम की पट्टिका हटाकर नया नाम देने की कोशिश कर रही है। विधायक के इस सवाल पर सीएम ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री के नाम से बन रहे उस भवन का नाम कतई नहीं बदला जाएगा।
ट्रांसफर पॉलिसी पर नहीं मिल पाया जवाब
सदन में ट्रांसफर पॉलिसी से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी सूचना मांगी गई है, जिसका संकलन करने में समय लग रहा है। सूचना संकलित होते ही उपलब्ध करा दी जाएगी। विपक्ष का कहना था कि ट्रांसफर पॉलिसी को नजरंदाज कर तैनाती दी गई है। यही कारण है कि तीन साल से वह सवाल का जवाब मांग रहे हैं।
लेकिन अब तक जवाब नहीं मिल सका है। भटियात से विधायक विक्रम सिंह जरयाल ने प्रदेश में विभिन्न विभागों में कार्यरत उन कर्मचारियों अधिकारियों का ब्योरा मांगा था जो स्थानांतरण नीति के विपरीत अपने होम ब्लॉक और समीपवर्ती ब्लॉक में तैनात हैं या सेवाएं दे रहे हैं। विधायक ने ऐसे कर्मियों का ब्योरा जिला और विभागवार मांगा था।
रोपवे यात्रियों को बीमा कवर देगी सरकार, विधेयक पारित
हिमाचल प्रदेश में रोपवे से सफर करने वाले यात्रियों को सरकार बीमा कवर देगी। विधानसभा में रज्जु मार्ग संशोधित विधेयक 2015 पारित हो गया है। इस विधेयक के जरिये रज्जू मार्गों के निर्माण को सुगम बनाने और उसके कार्यसंचालन को विनियमित करने में मदद मिलेगी। राज्य में पर्यटन की असीम संभावनाओं को देखते हुए यह विधेयक राज्य के विकास में सहायक सिद्ध होगा।
विधानसभा में मुख्यमंत्री ने बताया कि भवनों के छत शिखर और रज्जु मार्गों के केबिन के आधार के बीच न्यूनतम 10 मीटर का हेड वे बनाया जाएगा। भाडे़ की अधिकतम सीमा का नियतन करने और आकाशी रज्जु मार्ग सेवाएं प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को बीमा रक्षण प्रदान करना आवश्यक समझा गया है।
धूमल ने उठाया बेरोजगारों को रोजगार का मुद्दा
राज्यपाल अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने बेरोजगारों को रोजगार का मुद्दा भी उठाया। कहा कि प्रदेश सरकार जहां पंचायती राज चुनाव के शांतिपूर्ण संपन्न होने का दावा कर रही है जबकि कई स्थानों पर मत पत्रों के गुम होने सहित अन्य मामले सामने आए।
जिला परिषद और बीडीसी सदस्यों को भी 14 वें वित्तायोग से मिलने वाले धन का आवंटन किया जाना चाहिए। विधायक अजय महाजन ने चर्चा में भाग लेते हुए प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को गिनवाया। कहा कि केंद्र सरकार ने चुनाव के दौरान जो वायदे किए गए थे, वह आज जुमले बन गए हैं।
और बाहर चले गए सीएम- नेता प्रतिपक्ष धूमल के आरोपों का जवाब देने के लिए जब पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा खड़े हुए तो विपक्ष ने इसका विरोध किया। इस बीच मुख्यमंत्री कहने लगे कि मंत्री बोल सकते हैं। अनिल शर्मा के सीट पर बैठने के बाद सीएम सदन से बाहर चले गए।
पार्किंग मसले पर सीएम बोले, विधायकों की प्रतिष्ठा से कोई समझौता नहीं होगा
पिछले कुछ समय से विवादों में चल रहा मेट्रोपोल विधायक निवास के बाहर पार्किंग का मुद्दा विधानसभा में खूब गूंजा। विधायकों का आरोप था कि कानून बनाने वाली विधायिका के सदस्यों के साथ ही पुलिस अपराधियों जैसा सलूक कर रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विधायकों का समर्थन करते हुए आश्वासन दिया कि विधायकों की प्रतिष्ठा से कोई समझौता नहीं होगा।
आश्वस्त किया कि मेट्रोपोल के बाहर विधायकों को वाहन पार्किंग की जगह मुहैया कराई जाएगी। विधायक सुरेश भारद्वाज और हंसराज ने कहा कि परमिट जारी करना और उसके लिए कानून विधायिका ने बनाया। न्यायपालिका की एक जजमेंट के आधार पर इस तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विधायक रविंद्र रवि ने कहा कि जिस तरह विधानसभा अध्यक्ष की गाड़ी का चालान किया गया, उसी दिन अगर इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई और प्रतिक्रिया दी जाती तो विधायकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
विधायक किशोरी लाल ने कहा कि कोर्ट के आदेश के नाम पर पुलिस कर्मी ने उनकी गाड़ी में लगा विधायक का स्टिकर तक फाड़ दिया। विधायक जयराम ने भी पुलिस द्वारा उनके और परिवार के साथ बदसलूकी का आरोप लगाया। विधायकों के इन वक्तव्यों पर विधानसभा अध्यक्ष ने समर्थन करते हुए कहा कि गृह विभाग के अधिकारियों ने इस स्थिति को खराब किया है। सीएम ने कहा कि विधायकों को मेट्रो पोल के बाहर वाहन पार्किंग के लिए येलो लाइन खींच दी जाएगी।
बजट सत्र में सरकार के जवाब
मार्च तक पूरी हो जाएगी डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया- बजट सत्र के चौथे दिन खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले मंत्री जीएस बाली ने साफ किया है कि सामान्य राशन कार्डों को डिजिटल राशन कार्ड में बदलने की प्रक्रिया को मार्च महीने में पूरा कर लिया जाएगा। बाली ने भोरंज से विधायक ईश्वर दास धीमान के सवाल पर यह जवाब दिया।
अब पीडब्ल्यूडी करेगा स्कूलों का निर्माण- सर्व शिक्षा अभियान व राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत मिलने वाले बजट से अब पीडब्ल्यूडी स्कूलों में निर्माण कार्य करेगा। चौपाल के विधायक बलबीर सिंह वर्मा के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल भवनों व उनके जीर्णोद्घार के लिए अब यह बजट पीडब्ल्यूडी को दिया जाएगा।
188 सड़कों के लिए बजट का है इंतजार- सीएम वीरभद्र सिंह ने मंगलवार को सदन को बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्य सरकार ने 188 सड़कों के निर्माण के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। करीब 731 करोड़ की लागत वाले इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार विचार कर रहा है। सीएम ने यह जवाब जोगिंद्रनगर से विधायक गुलाब सिंह ठाकुर व जसवां-प्रागपुर के बिक्रम सिंह के सवाल पर दिया।
विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि राज्यपाल ने अपने अभिभाषण के तहत श्लोक के माध्यम से मानवता का संदेश दिया था। उन्होंने कि प्रदेश की जनता को पीडीएस के माध्यम से सस्ता राशन उपलब्ध करवाया जा रहा है। विधायक बलदेव सिंह तोमर ने कहा कि सरकारी स्कूलों का स्तर गिर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में अध्यापकों की कमी है।
विधायक सोहन लाल ने कहा कि सरकार ने तीन साल के कार्यकाल में 954 शिक्षण संस्थानों को स्तरोन्नत जबकि 23 महाविद्यालय खोले गए हैं। विधायक कर्नल इंद्र ने कहा कि उनके विस क्षेत्र में विकास कार्य ठप पड़े हैं। विधायक रवि ने चर्चा में भाग लेते हुए जनजातीय क्षेत्रों का मामला उठाया। विधायक हंसराज स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों में कई पद रिक्त भरने पर सरकार को घेरा।
हिप्र अधीनस्थ न्यायालय कर्मचारी अधिनियिम संशोधन विधेयक पास- मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ न्यायालय कर्मचारी (वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तें) अधिनियम 2005 (2006 का अधिनियम संख्यांक 3) का संशोधन करने के लिए विधेयक पेश किया।
साथ ही प्रदेश अधीनस्थ न्यायालय कर्मचारी (वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तें) द्वितीय संशोधन विधेयक 2015 (2015 का विधेयक संख्यांक 22) को सदन में रखा गया। दोनों ही संशोधन बिल पास हो गए।