हिमाचल प्रदेश के प्राइमरी और मिडल स्तर के कई स्कूलों पर ताले लगाने की नौबत आ गई है। पहली से आठवीं कक्षा वाले 6449 सरकारी स्कूलों में 20 से कम और 5205 स्कूलों में 60 से कम विद्यार्थी रह गए हैं। यू डाइस 2020-21 की रिपोर्ट में सामने आए यह आंकड़े सरकार की चिंता बढ़ाने वाले हैं।
10,574 प्राइमरी स्कूलों में से 5431 में 20 और 4326 में साठ से कम विद्यार्थी रह गए हैं। 1948 मिडल स्कूलों में से 1018 में 20 और 879 में 60 से कम नामांकन है। यू डाइस के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 601 प्राइमरी स्कूलों में 61 से 100 विद्यार्थी, 146 स्कूलों में 101 से 140 विद्यार्थी, 46 स्कूलों में 141 से 220, 12 स्कूलों में 221 से 300 और 300 विद्यार्थियों से अधिक संख्या वाले 12 स्कूल हैं।
छठी से आठवीं कक्षा वाले 42 स्कूलों में 61 से 100, आठ स्कूलों में 101 से 140, एक स्कूल में 141 से 220 विद्यार्थी हैं। प्रदेश में ऐसा कोई भी मिडल स्कूल नहीं है जहां विद्यार्थियों की संख्या 220 से अधिक है। विद्यार्थियों की 20 से कम संख्या वाले कई स्कूल वर्तमान में सिर्फ शिक्षकों की ऐडजस्टमेंट के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। राजधानी शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश जिला मुख्यालयों से सटे स्कूलों में विद्यार्थियों का नामांकन सबसे कम हैं।
जबकि शिक्षकों की संख्या इन स्कूलों में विद्यार्थियों के अनुपात में कहीं अधिक है। वहीं प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या तो अधिक है लेकिन यहां शिक्षकों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
बीते लंबे समय से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का युक्तिकरण भी नहीं हुआ है। इसका लाभ उठाते हुए ही सत्ता के करीबियों तक पहुंच रखने वाले शिक्षक शहरों से सटे स्कूलों में ही टिके हुए हैं। विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात का भी इन स्कूलों में सही मायने में पालन नहीं हो रहा है। सरकारी स्कूलों में अगर यूं ही विद्यार्थियों का नामांकन घटता रहा तो इन स्कूलों को साथ लगते स्कूलों में मर्ज करना पड़ सकता है। विद्यार्थियों की कम संख्या वाले ऐसे स्कूलों में विद्यार्थियों से ज्यादा खर्च शिक्षकों पर सरकार को करना पड़ रहा है।
20 से कम संख्या वाले एक वर्ष में बढ़े 129 प्राइमरी स्कूल
एक वर्ष के दौरान प्रदेश में 20 से कम संख्या वाले 129 प्राइमरी और 46 मिडल स्कूल बढ़े हैं। जबकि 60 से कम संख्या वाले 122 प्राइमरी स्कूलों में सुधार हुआ है। वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2020 में 60 से कम संख्या वाले विद्यार्थियों के स्कूलों में कमी आई है। इन स्कूलों की संख्या अब 4448 से कम होकर 4326 रह गई है।
251 प्राइमरी, पांच मिडल स्कूल एक-एक कमरे में चल रहे
प्रदेश के 251 प्राइमरी और पांच मिडल स्कूल एक-एक कमरे में चल रहे हैं। इसके अलावा 249 प्राइमरी स्कूल दो कमरों, 1136 स्कूल तीन कमरों, 294 स्कूल चार से छह और 18 स्कूल सात से दस कमरों में चल रहे हैं। 23 मिडल स्कूल दो कमरों, 135 स्कूल तीन कमरों, 693 स्कूल चार से छह कमरों, 72 स्कूल सात से दस और पांच स्कूल 11 से 15 कमरों में चल रहे हैं। प्रदेश में छह ऐसे वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल भी हैं जो दो कमरों और 15 स्कूल तीन कमरों में चल रहे हैं।
1991 प्राइमरी, 66 मिडल स्कूल एक-एक शिक्षक के सहारे
प्रदेश में 1991 प्राइमरी स्कूल और 66 मिडल स्कूल एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। 6479 प्राइमरी और 378 मिडल स्कूलों में दो-दो तथा 1573 प्राइमरी और 746 मिडल स्कूलों में तीन-तीन शिक्षक ही नियुक्त हैं। दो माध्यमिक स्कूलों और एक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में भी सिर्फ एक-एक शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं।