आईजीएमसी अस्पताल में इलाज महंगा हो गया है। वीरवार को रोगी कल्याण समिति की हंगामेदार बैठक में महंगे इलाज पर स्वीकृति की मुहर लग गई है। जनरल वार्ड के मरीजों के लिए करीब पचास फीसदी और स्पेशल वार्ड के मरीजों के इलाज की दरें दोगुना बढ़ाई गई हैं।
विज्ञापन
जनरल वार्ड में दाखिल मरीजों को मेजर आपरेशन के लिए 200 की जगह 500 चुकाने होंगे वहीं स्पेशल वार्ड के मरीजों को इसका शुल्क 2000 देना होगा। इतना ही नहीं स्पेशल वार्ड की दरें भी बढ़ा दी गई हैं। अल्ट्रा साउंड के लिए अब 60 की जगह मरीजों को 120 का टेस्ट शुल्क देना होगा।
रोगी कल्याण समिति की बैठक दोपहर तीन बजे चेयरमैन स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह की अध्यक्षता में शुरू हुई। टेस्ट फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी करने के पक्ष में अधिकांश सदस्य नहीं थे। इनका तर्क था कि पहले मरीजों को सुविधाएं दो उसके बाद दरों में इजाफा करो। सदस्यों ने अस्पताल प्रबंधन की पोल भी मंत्री के सामने खोल कर रख दी।
विज्ञापन
एक माह में छह लाख रुपये का चूना
एसआरएल लैब खुलने के बाद अस्पताल की लैब घाटे में जा रही है। सितंबर माह में आरकेएस की लैब से कमाई 20 लाख 74 हजार 440 रुपये थी। अक्तूबर में यह घटकर 14 लाख 39 हजार 465 रह गई। एक महीने में ही आईजीएमसी को 6 लाख 34 हजार 675 का चूना लगा।
एसआर लैब पर उठाए सवाल एसआरलैब पर अस्पताल कर्मचारी महासंघ के महासचिव हरिंद्र मेहता ने सवाल उठाते हुए कहा कि बाहर से भी टेस्ट के सैंपल लिए जा रहे हैं। अलग से इसके दाम वसूलते हैं। इस पर किसी का चेक नहीं है। कहा कि जिस ध्येय से यह लैब खोली है उसकी अनुपालना नहीं हो रही है। इस पर बैठक में प्रस्ताव पारित हुआ कि इस निजी लैब के कैश काउंटर पर सरकारी कर्मचारी की तैनाती होगी।
विधायक ने किया विरोध विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि एसआर लैब का अस्पताल के भीतर खोलने को कोई औचित्य नहीं। सरकारी लैब केवल तीन घंटे चल रही है, करोड़ों की मशीनरी खराब हो रही है। निजी लैब को 23 घंटे चलने की इजाजत है मरीजों से पैसा लिया जा रहा है। इसकी परमिशन रद्द की जाए।
वार्ड ब्वॉय मामले में जांच के आदेश
आईजीएमसी में तैनात 121 वार्ड बॉय ठेकेदार के अधीन काम कर रहे हैं। प्रत्येक वार्ड ब्वॉय को ठेकेदार 4500 सौ मासिक और पीएफ दे रहा है। रोगी कल्याण समिति ठेकेदार को प्रति कर्मचारी 7200 का भुगतान कर रही है।
कमेटी के सदस्य के कर्मचारी नेता एसएस जोगटा ने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी पर ठेकेदार करीब 2160 रुपये बचा रहा है। हर साल 31 लाख 36 हजार 320 का मुनाफा कमा रहा है। उन्होंने बैठक में सुझाव दिया कि इन्हें आरकेएस के तहत रखा जाए इन्हें मासिक वेतन 6200 भी देते हैं तो आरकेएस को 14 लाख 37 हजार का वार्षिक मुनाफा होगा।
ऐसे में ठेकेदार को बिचौलिया बना रखा है। इस पूरे मामले की जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं।
मेजर ऑपरेशन की प्रस्तावित फीस
जरनल वार्ड-------------------स्पेशल वार्ड 200 से हुए 500----------------900 से हुए 2000
माइनर ओटी चार्ज जनरल वार्ड-------------------स्पेशल वार्ड 25 से 100--------------------60से 200 मौजूदा
वीआईपी रूम 1000 महंगा शेयरिंग रूम 300 से 500 सिंगल रूम 300 से 1000 और वीआईपी रूम 500 से 1500 की दर से मिलेगा इस पर बैठक में मंजूरी मिल गई है।
स्पेशल वार्ड में पीजीआई से महंगा अल्ट्रा साउंड आईजीएमसी में पीजीआई की तर्ज पर स्वास्थ्य सेवाएं तो नहीं मिल पातीं लेकिन आईजीएमसी प्रबंधन अल्ट्रासाउंड टेस्ट पीजीआई से महंगा करने पर हंगामा हो गया। विधायक सुरेश भारद्वाज इसे 60 से 100 रुपये करने के पक्ष में थे। इसकी दर 150 रुपये प्रस्तावित की गई थी। सभी की सहमति के बाद 120 रुपये पर सहमति हो गई लेकिन स्पेशल वार्ड के मरीज को अल्ट्रा साउंड करवाने के लिए 300 रुपये देने होंगे यह पीजीआई से भी महंगा होगा।
रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने कहा कि 168 करोड़ की राशि इस वित्त वर्ष के दौरान खर्च की जा रही है। इस योजना के तहत गत वर्ष 139 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तीसरे चरण का कार्यक्रम आईजीएमसी में शुरू हो गया।
इस योजना के तहत 150 करोड़ रुपये की राशि संस्थान के विकास और आधुनिक उपकरणों रक खर्च होंगे। 45 करोड़ की लागत से बनने वाले ओपीडी परिसर के लिए टेंडर प्रक्रिया आरंभ हो गई है। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य विनीत चौधरी, अतिरिक्त उपायुक्त यूनुस, विधायक सुरेश भारद्वाज, कॉलेज के प्रिंसिपल एसएस कौशल, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश, कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष एसएस जोगटा, महासचिव हरिंद्र मेहता मौजूद रहे।