डॉ. लोबसंग सांग्ये लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत लगातार दूसरी बार निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाल ली है।
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वर्ष 2011 में 14वें धर्मगुरु दलाईलामा की राजनीतिक विरासत संभालने वाले डॉ. लोबसंग सांग्ये लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत लगातार दूसरी बार निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाल ली है।
मैकलोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर में मुख्य अतिथि धर्मगुरु दलाईलामा की मौजूदगी में दार्जिलिंग में जन्मे डा. लोबसंग सांग्ये ने हजारों तिब्बतियों और बौद्ध भिक्षुओं की उपस्थिति में निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री के तौर पर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
शपथ लेते ही सांग्ये ने कहा कि अगर सब कुछ सही रहा तो निर्वासित तिब्बत सरकार अगले पांच में स्वायत्तता हासिल कर सकती है। उन्होंने कहा कि स्वायत्तता की रणनीति बनाई जाएगी। सफलता के 50-50 फीसदी चांस हैं।
इससे पहले शुक्रवार को तिब्बतियन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आयुक्त कारग्यू डोंडुप ने सांग्ये को शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में अरुणाचल के मुख्यमंत्री के सलाहकार एवं विधायक आरके खरीमे भी मौजूद रहे।
सांग्ये ने तिब्बती समुदाय की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का प्रण लिया। सांग्ये ने चुनाव प्रचार के दौरान नैतिक कमियों के लिए तिब्बती समुदाय से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यह दुखद पल था जिसकी वजह से धर्मगुरु दलाईलामा भी व्यथित थे।
मैंने इसके लिए धर्मगुरु से माफी भी मांगी है। भविष्य में इस तरह की गलती कभी नहीं होगी, हम इसका प्रण लेते हैं। उनकी सरकार मध्य मार्ग नीति से तिब्बत की आजादी के लिए काम करेगी। सांग्ये ने दावा किया कि वे अगले पांच वर्षों में तिब्बत की स्वायत्तता हासिल कर सकते हैं।
चीन भी अगले 50 वर्षों में देश की बेहतरी के लिए धीरे-धीरे परिवर्तित होगा। सांग्ये ने निर्वासित तिब्बत सरकार को सहयोग देने के लिए भारत और धर्मगुरु दलाईलामा का आभार जताया।