लूणापानी निवासी राहुल व पिता डॉ. रमेश चंद के साथ।
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यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध ने बेटे की चिंता बढ़ा दी है। हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय में कार्यरत उपनिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. रमेश चंद ने यह जानकारी मीडिया को दी हैं। डॉ. रमेश चंद ने बताया कि बेटा राहुल कुमार यूक्रेन के दूसरे बड़े शहर खार्किव में रहता है। वहां के शहर खार्किव स्थित वीएन कराजान नेशनल यूनिवर्सिटी में थर्ड ईयर में शिक्षा ग्रहण कर रहा है। वे 2019 से वहां पर हैं। बताया कि बेटे की घर वापसी की तैयारी चल रही थी। इस युद्ध के बाद अब फ्लाइटें बंद हो गई हैं। आवाजाही बंद होने से वह भी वहां फंस गया है। हालांकि, गुरुवार सुबह बेटे से बात हुई तो बताया कि शहर में ब्लास्ट हुआ है। इसीलिए अब चिंता और बढ़ गई है। राहुल के पिता ने सरकार व प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके पुत्र को जल्द कुशलता से भारत पहुंचाया जाए। वह आने को तैयार थे, लेकिन रूस के अचानक हमले ने उनके आने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
शिक्षण संस्थानों ने विद्यार्थियों को बाहर न निकलने की दी हिदायत
जिला ऊना से भी कई विद्यार्थी यूक्रेन में एमबीबीएस की डिग्री करने गए हैं। इनमें विधानसभा क्षेत्र गगरेट की चार छात्राएं भी हैं। अंबोआ से विकास परमार की बेटियां विभावरी सिंह व शिवांगनी सिंह, डंगोह गांव के प्रवीण कौशल की पुत्री अनिका कौशल, नंगल जरियालां गांव के राकेश कुमार की पुत्री आकांक्षा यूक्रेन में एमबीबीएस कर रही हैं। विकास परमार ने बताया कि वीरवार को बेटियों से बात हुई है। उन्हें शिक्षण संस्थान ने जहां वे हैं, वहीं रहने की हिदायत दी गई है। उनसे बाहर न निकलने के लिए कहा गया है। बेटियों ने बताया कि उन्होंने पास खाद्य और अन्य जरूरी सामान जरूरत के अनुसार रख लिया है। डंगोह की अनिका कौशल के पिता प्रवीण कौशल ने बताया कि जिस स्थान पर उनकी बेटी का शिक्षण संस्थान है, वहां परिस्थितियां उतनी खराब नहीं हैं। उन्होंने उस एजेंट से बात की है, जिसके माध्यम से बेटी को यूक्रेन भेजा था। अब शायद उन्हें पोलैंड के रास्ते भारत लाने की योजना है। परिजनों ने केंद्र सरकार से भी मामले में जल्द हस्तक्षेप कर विद्यार्थियों को सुरक्षित स्वदेश लाने की मांग की है।