शिमला। शिमला व्यापार मंडल चुनाव पर दोफाड़ हुए शहर के कारोबारी आखिरकार एक साथ चुनाव करवाने के लिए तैयार हो गए हैं। यह चुनाव 29 अगस्त को होंगे या फिर पांच सितंबर को, अब इस पर फैसला लिया जाना है।
इस पर भी अगले एक-दो दिन में फैसला हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार व्यापार मंडल ने ही नाराज कारोबारियों को मनाने की पहल की है। हाल ही में शिमला व्यापार मंडल के पदाधिकारी नाराज कारोबारी नेताओं से मिले हैं। दोनों धड़ों के नेताओं ने एक-दूसरे के गिले शिकवे दूर कर दिए हैं। शिमला व्यापार मंडल का कहना है कि कारोबारी दोफाड़ नहीं होने चाहिए। जब दोनों गुट चुनाव चाहते हैं तो ये चुनाव मिलकर एकसाथ भी करवाए जा सकते हैं।
उधर, नाराज धड़ा भी इस पर एक साथ चुनाव को तैयार हो गया है। हालांकि, चुनाव तारीख पर अंतिम फैसला करने के लिए दोबारा कारोबारियों की बैठक होगी। अभी शिमला व्यापार मंडल महासचिव संजीव ठाकुर सिक्किम दौरे पर हैं। उनके लौटने पर चुनाव तारीख तय होगी। यदि दोनों गुट एकसाथ चुनाव को तैयार हो जाते हैं तो नई चुनाव कमेटी बनाने पर भी फैसला लिया जाएगा। अभी दोनों गुटों ने अलग-अलग चुनाव कमेटियां बना रखी हैं।
चुनाव की मंजूरी मिलेगी या या नहीं, इस पर असमंजस
दोनों धड़े एक साथ चुनाव को तो तैयार हो गए हैं। लेकिन इन्हें चुनाव करवाने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मिलेगी या नहीं, इस पर असमंजस है। दोनों धड़ों ने चुनाव के लिए अनुमति मांगी है। उधर, जिला प्रशासन कोरोना के मामलों पर नजर रखे हुए है। यदि आने वाले दिनों में सरकार और पाबंदिया लगाती है तो चुनाव की अनुमति मिलना मुश्किल हो जाएगी।
एक साथ चुनाव करवाने का प्रयास
शिमला व्यापार मंडल के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह का कहना है कि शहर के कारोबारी एक चुनाव चाहते हैं। इसीलिए मिलकर एक ही चुनाव करवाने की कोशिश की जा रही है। दूसरे धड़े के कारोबारी नेताओं से इस पर बात हो चुकी है।
हम एकसाथ चुनाव को तैयार
नाराज धड़े के कारोबारी नेता अश्वनी मिनोचा का कहना है कि वह एक साथ चुनाव करवाने के लिए तैयार हैं। चुनाव पांच सितंबर को होंगे। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों से उनकी बात हुई है। सभी मिलकर चुनाव करवाने के लिए तैयार हैं।
संजौली के कारोबारियों ने किया बहिष्कार
संजौली उपनगर के कारोबारियों ने शिमला व्यापार मंडल के चुनाव का बहिष्कार कर दिया है। स्थानीय कारोबारी नेता रवि कुमार का कहना है कि व्यापार मंडल चुनाव जीतने के बाद उपनगरों को अपना हिस्सा नहीं समझता। उपनगरों की समस्याएं तक नहीं उठाई जाती। ऐसे में संजौली के कारोबारी इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे।