हिमाचल की पब्लिक को अफसरों और नेताओं के ठाठबाट पसंद नहीं। सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने के लिए पब्लिक चाहती है कि निगम, बोर्ड के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन हटाने से लेकर अफसरशाही पर होने वाले बेतुके खर्चे कम किए जाएं।
जनता की ओर से कैबिनेट सब कमेटी रिसोर्स एवं मोबलाइजेशन को भेजे गए अहम सुझाव में यह तथ्य सामने आए हैं। अब सवाल यह है कि कमेटी की ओर से तैयार की जाने वाली रिपोर्ट में इसे शामिल किया जाता है या नजरअंदाज।
इस सिलसिले में 14 जनवरी को धर्मशाला में कमेटी की अंतिम बैठक होने की संभावना है, जिसमें रिपोर्ट को फाइनल किया जाएगा।
अफसरों को दिए बड़े सुझाव
अफसरों के वाहनों को उनके परिवार के सदस्य इस्तेमाल न करें। यह व्यवस्था सरकार की ओर से सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा शिमला में होने वाली बैठकों में एक जिले से 20-20 वाहनों को दौड़ाया जाता है, जिसकी संख्या पुल बनाकर कम हो।
साथ ही प्रदेश के किसी भी अधिकारी के पास एक से अधिक वाहन न हो। सरकारी गाड़ियों में बीवी बच्चों को घुमाने पर रोक लगे।
निगम, बोर्ड के चेयरमैन पद को खत्म किया जाए। हर महीने बेवजह खर्च हो रहे हैं करोड़ों रुपये। अफसरशाही को मिलने वाले सत्कार भत्ते को कम किया जाए। इससे सरकार की करोड़ों रुपये की होगी बचत। अफसरों की ओर से बेवजह किए जाने वाले यात्राओं पर अंकुश लगाया जाए। पेट्रोल खर्चों को कम किया जाए।
सरकारी वाहनों में लगे जीपीआरएस सिस्टम
प्रदेश सचिवालय चालक एवं कर्मशाला संघ ने रिसोर्स मोबलाइजेशन कैबिनेट सब कमेटी को सरकारी वाहनों में जीपीआरएस सिस्टम लगाने का सुझाव दिया है। इससे जहां लॉग बुक भरने का झंझट खत्म होगा वहीं ये पता भी आसानी से लग जाएगा कि सरकारी वाहनों का प्रयोग सरकारी काम के लिए किया जा रहा है या नहीं। संघ के महासचिव शांति स्वरूप ने बताया कि सरकारी चालकों को शक की निगाह से देखा जाता है।
इसलिए स्थिति साफ हो जाएगी। उन्होंने अपने सुझाव में मंत्री के साथ एक वाहन सचिवालय से और एक वाहन विभाग से लेने की बात कही है। विभाग के वाहन का उपयोग केवल प्रवास के लिए होना चाहिए। निजी सचिव व स्टाफ के लिए सरकार वाहन भत्ता देती है।
05 माह पहले बनी थी कमेटी
हिमाचल प्रदेश कैबिनेट ने जुलाई अंतिम सप्ताह में चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया था, जिसे तीन माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। लेकिन, सदस्य कौल सिंह ठाकुर ने शुरू में ही कमेटी से खुद को अलग कर लिया था। ऐसे में तीन सदस्यीय कमेटी ही काम कर रही है।
स्टोक्स बोली सरकार को जाएगी रिपोर्ट
वित्तीय संकट से पार पाने के उपाय तलाशने के लिए गठित रिसोर्स मोबलाइजेशन कमेटी एक हफ्ते के भीतर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। कमेटी की अध्यक्ष विद्या स्टोक्स ने इसकी पुष्टि की है। सोमवार को कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में पार्टी कार्यकर्ताओं व आम जनता की समस्याएं सुनने के लिए पहुंची विद्या स्टोक्स ने कहा कि कमेटी के पास कई सुझाव आए हैं।
इन सुझावों में सरकार के गैर वाजिब खर्च कम करने की बात कही गई है। मंत्रियों के पीछे चलने वाली अनावश्यक गाड़ियों की संख्या कम करने से पेट्रोल का खर्च बचेगा। मेडिकल रिइंबर्समेंट बिलों को लेकर भी ठोस पॉलिसी बनाने की बात कही गई है।
सरकार हर साल करोड़ों रुपये सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के मेडिकल बिलों के भुगतान पर फूंक देती है। मंत्रियों और आईएएस अधिकारियों को हर माह मिलने वाले चाय-पानी के खर्च को कम करने का भी सुझाव है। आईएएस अधिकारियों को हर माह तीन से पांच हजार रुपए की रकम चाय-पानी पर खर्च के लिए मिलती है।